Wednesday, December 7, 2022

क्या आप आपके अंतिम समय में ऐसी मौत चाहेंगे????

😢❤️😢



पैसे वाले लोगों की एक आश्चर्यजनक रीति चल पड़ी है...,
बुजुर्ग बीमार हुए, एम्बुलेंस बुलाओ, जेब के अनुसार अच्छे अस्पताल ले जाओ, ICU में भर्ती करो और फिर जैसा जैसा डाक्टर कहता जाए, मानते जाओ!
और
अस्पताल के हर डाक्टर, कर्मचारी के सामने आप कहते है कि "पैसे की चिंता मत करिए, बस इनको ठीक कर दीजिए"
और
डाक्टर और अस्पताल कर्मचारी लगे हाथ आपके मेडिकल ज्ञान को भी परख लेते है और
फिर आपके भावनात्मक रुख को देखते हुए खेल आरम्भ होता है...

कई तरह की जांचे होने लगती है, फिर रोज रोज नई नई दवाइयां दी जाती है, रोग के नए नए नाम बताये जाते है और आप सोचते है कि बहुत अच्छा इलाज हो रहा है!
80 साल के बुजुर्ग के हाथों में सुइयां घुसी रहती है, बेचारे करवट तक नही ले पाते, ICU में मरीज के पास कोई रुक नही सकता या बार बार मिल नही सकते!
भिन्न नई नई दवाइयों के परीक्षण की प्रयोगशाला बन जाता है 80 वर्षीय शरीर।

आप ये सब क्या कर रहे है एक शरीर के साथ????

जबकि आपके ग्रन्थों में भी बताया गया है कि मृत्यु सदा सुखद परिस्थिति में होने, लाने का प्रयत्न करना चाहिए!
इसलिए
वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में बुजुर्ग अंतिम अवस्था मे घर मे हैं तो जिन लोगो को वो अंतिम समय मे देखना चाहते है, अपना वंश, अपना परिवार, वो सब आसपास रहते है!

बुजुर्ग की कुछ इच्छा है खाने की तो तुरन्त उनको दिया जाता है, भले ही वो एक कौर से अधिक नही खा पाएं,
लेकिन मन की इच्छा पूरी होना आवश्यक है...
मन की अंतिम अवस्था शांत, तृप्त होगी तो मृत्यु आसान, कष्टरहित लगती है!

अस्पताल के ICU में क्या ये संभव होता है?????
अस्पताल में कष्टदायक, सुइयां घुसे शरीर की पीड़ा...
क्या अस्पताल के ICU में बुजुर्ग की हर इच्छा पूरी होती है????

रोज नई नई दवाइयों का प्रयोग, कष्टदायक यांत्रिक उपचार, मनहूस जैसे दिनभर दिखते अपरिचित चेहरों के बीच बुजुर्ग के शरीर को बचाईये!!!

अगर आप सक्षम हैं तो अच्छी नर्स को घर मे रखिये, डॉक्टर फ़ीस लेकर रोज घर पर चेकअप करते है, घर मे सभी सुविधाएं उपचार करने का प्रयत्न कीजिये!

इस बुजुर्ग के पैर चेन से बंधे है, हाथ ड्रिप से स्थिर है, मुँह को ऑक्सीजन किट से बंद कर रखा है!
बुजुर्ग को कैदी बना रखा है!

क्या आप आपके अंतिम समय में ऐसी मौत चाहेंगे????
Neha Dixit Sharma

Sunday, April 24, 2022

हमें नहीं बनना प्राइवेट स्कूल जैसा ...

आखिर क्यों करते हैं हम

प्राइवेट स्कूलों से बराबरी

हम क्यों कहते हैं....

कि हमारे स्कूल प्राइवेट स्कूलों से कम नहीं...सच तो ये है

हमारे स्कूलों सा एक भी प्राइवेट स्कूल नहीं
और हो भी नहीं सकता।।।
हम बच्चे के एडमिशन से पहले नही लेते बच्चे का टेस्ट और
माता पिता का साक्षात्कार .....ये जांचने के लिए कि  वो बच्चे को पढ़ाने के लिए योग्य हैं या नहीं ....या उनके जीवन का स्तर जांचने के लिए।।।
हमें पता होता है कि हमारे बच्चों के अधिकतर माता पिता के लिए अक्षर केवल काला रंग भर हैं।।।।
बड़ी चुनौती है जिसे केवल हमारे स्कूल  स्वीकार करते हैं ।

होली दीवाली ईद बकरीद क्रिस्टमस हर त्योहार को खास  बनाने के लिए पूरी जान लगा देते हैं और बड़े बड़े स्कूलों की तरह हमारे स्कूल इसके लिए कोई एक्टिविटी फीस नहीं लेते हैं ।।।।

किसी भी क्षेत्र में बच्चों को कुछ करना हो तो
हम अभिभावक बन कर उनके लिए सारे सामान जुटाते हैं उन्हें मंच तक पहुचाते हैं
हमारे स्कूल प्राइवेट स्कूलों की तरह सामान की लिस्ट घर पर कहाँ भिजवाते है?

प्राइवेट स्कूल जो कि लेते हैं नर्सरी के बच्चों से भी कंप्यूटर फीस हमारे स्कूलों की smartclass की कीमत तो  बच्चों की मुस्कान से पूरी हो जाती है।

हमारे स्कूल फैंसी ड्रेस कॉम्पटीशन के नाम पर  पेरेंट्स को बाजार दर बाजार घूमने पर मजबूर नहीं करते ।

हमारे स्कूल जिम्मेदारी लेते हैं लिखाने पढ़ाने और सिखाने की।।। बड़े बड़े स्कूलों की तरह ये लिखाने के बाद
समझाने और याद कराने की जिम्मेदारी अभिभावक को नहीं सौंपते ।

हमारे स्कूल let us learn पर चलते हैं पाठ लिखाकर learn it पर नहीं।।।

हमारे स्कूलों का बस्ता थोड़ा कम अच्छा सही पर वजन उतना ही होता है जितने में बच्चों के शरीर,मन और मस्तिष्क पर बोझ न पड़े ।।।।प्राइवेट स्कूलों की तरह हमारे स्कूल बस्ता भारी और अभिभावक की जेब हल्की नहीं करते।।।।।

हमारे बच्चे बीमार होते हैं तो पूरे स्कूल को पता होता है पर बड़े बड़े स्कूलों का फ़ोन पेरेंट्स के पास केवल तब आता है जब फीस 2 दिन late हो जाती है ।

हमारे स्कूल ,शिक्षक और हमारे अभिभावक बच्चों को सहजता से सीखने देते हैं  बच्चों के 60% को भी सेलिब्रेट करते हैं 90%कि दौड़ में भगाते भगाते उनका बचपन नहीं छीनते।।।।

नहीं होना है हमें प्राइवेट स्कूलों की तरह हमें  देना है अपने बच्चों को सरल सी दुनियाँ उनके जीवन से जुड़े अनगिनत खेल कविता और कहानियां  पेड़ पौधों का साथ और दोस्तों की मस्त टोलियां खिलखिलाते हंसी के फव्वारे और सीखने के लिए सुविधाओं से भरे केवल वो  कमरे नहीं जो कुछ दिनों में उबाऊ हो जाते हैं ।।।।।प्रकृति का सजाया हुआ खुला  आसमान देना है।।।।तो गर्व से कहें कि हम सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं।।।

- via Santosh Kumari जी