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Tuesday, June 24, 2014

शिर्डी साईं- भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड।


साईं के बारे में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा :
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पिण्डारी डाकू साईं की असली कहानी और उसके द्वारा हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद फैलाने के षड्यंत्र का भांडाफोड़

पिछले दिनों मेरे एक मित्र ने शिर्डी साईं के बारे में बहुत सी जानकारी इकठ्ठा की और मुझे बताया की साईं असल में क्या है कहा से आया, जन्म मरण और फिर इतना लम्बे समय बाद उसका अचानक भगवान बन कर निकलना,

ये सब कोई संयोग नहीं सोचा समझा षड्यंत्र है,
ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी MI5 जी हाँ मित्रो, एक ब्रिटिश एजंसी ने श्री राम मंदिर आन्दोलन के बाद अचानक साईं की भक्ति में तेजी देखि, वैसे ब्रिटेन और शिर्डी के साईं का रिश्ता बहुत ही गहरा है क्युकी ये साईं वही है जो 1857 की क्रांति में कुछ लूटेरो के साथ पकड़ा गया था, और वह अहमदनगर में पहली बार साईं की फोटो ली गयी थी, जिसे मैं जल्दी ही आप सभी के सामने पेश करूँगा

MI5 ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी है , साईं का पूरा इतिहास खोज निकलने में इस एजंसी का महत्वपूर्ण योगदान है, साईं का जन्म 1838में हुआ था, पर कैसे हुआ और उसके बाद की पूरी कथा बहुत ही रोचक है,

साईं के पिता का असली नाम था बहरुद्दीन, जो की अफगानिस्तान का एक पिंडारी था, वैसे इस पर एक फिल्म भी आई थी जिसमे पिंडारियो को देशभक्त बताया गया है, ठीक वैसे ही जैसे गाँधी ने मोपला और नोआखली में हिन्दुओ के हत्यारों को स्वतंत्रसेनानी कहा था,
औरंगजेब की मौत के बाद मुग़ल साम्राज्य ख़तम सा हो गया था केवल दिल्ली उनके

आधीन थी, मराठा के वीर सपूतो ने एक तरह से हिन्दू साम्राज्य की नीव रख ही दी थी, ऐसे समय में मराठाओ को बदनाम करके उनके इलाको में लूटपाट करने का काम ये पिंडारी करते थे, इनका एक ही काम था लूत्पार करके जो औरत मिलती उसका बलात्कार करना, आज एक का बलात्कार कल दूसरी का, इस तरह से ये मराठाओ को तंग किया करते थे, पर समय के साथ साथ देश में अंग्रेज आये और उन्होंने इन पिंडारियो को मार मार कर ख़तम करना शुरू किया,

साईं का बाप जो एक पिंडारी ही था, उसका मुख्य काम था अफगानिस्तान से भारत के राज्यों में लूटपाट करना, एक बार लूटपाट करते करते वह महाराष्ट्र के अहमदनगर पहुचा जहा वह एक वेश्या के घर रुक गया, उम्र भी जवाब दे रही थी, सो वो उसी के पास रहने लग गया, कुछ समय बाद उस वेश्या से उसे एक लड़का और एक लड़की पैदा हुआ, लड़के का नाम उसने चाँद मियां रखा और उसे लेकर लूट पात करना सिखाने के लिए उसे अफगानिस्तान ले गया,

उस समय अंग्रेज पिंडारियो की ज़बरदस्त धर पकड़ कर रहे थे इसलिए बहरुद्दीन भेस बदल कर लूटपाट करता था उसने अपने सन्देश वाहक के लिए चाँद मिया को रख लिया,
चाँद मिया आज कल के उन मुसलमान भिखारियों की तरह था जो चादर फैला कर भीख मांगते थे, जिन्हें अँगरेज़ blanket bagger कहते थे, चाँद मिया का काम था लूट के लिए सही वक़्त देखना और सन्देश अपने बाप को देना, वह उस सन्देश को लिख कर उसे चादर के निचे सिल कर हैदराबाद से अफगानिस्तान तक ले जाता था, पर एक दिन ये चाँद मियां अग्रेजो के हत्थे लग गया और उसे पकडवाने में झाँसी के लोगो ने अंग्रेजो की मदद की जो अपने इलाके में हो रही लूटपाट से तंग थे

उसी समय देश में पहली आजादी की क्रांति हुई और पूरा देश क्रांति से गूंज उठा, अंग्रेजो के लिए विकत समय था और इसके लिए उन्हें खूंखार लोगो की जरुरत थी, बहर्दुद्दीन तो था ही धारण का लालची, सो उसने अंग्रेजो से हाथ मिला लिया और झाँसी चला गया, वह उसने लोगो से घुलमिल कर झाँसी के किले में प्रवेश किया और समय आने पर पीछे से दरवाजा खोल कर रानी लक्ष्मी बाई को हारने में अहम् भूमिका अदा की,

यही चाँद मिया आठ साल बाल जेल से छुटकर कुछ दिन बाद शिर्डी पंहुचा और वह के सुलेमानी लोगो से मिला जिनका असली काम था गैर मुसलमानों के बिच रह कर चुपचाप इस्लाम को बढ़ाना| चाँद मियां ने वही से अल तकिया का ज्ञान लिया और हिन्दुओ को फ़साने के लिए साईं नाम रख कर शिर्डी में आसन जमा कर बैठ गया, मस्जिद को जानबूझ कर एक हिन्दू नाम दिया और उसके वहा ठहराने का पूरा प्रबंध सुलेमानी मुसलमानों ने किया, एक षड्यंत्र के तहत साईं को भगवान का रूप दिखाया गया और पीछे से ही हिन्दू मुस्लिम एकता की बाते करके स्वाभिमानी मराठाओ को मुर्दा बनाने के लिए उन्हें उनके ही

असली दुश्मनों से एकता निभाने का पाठ पढाया गया
पर पीछे ही पीछे साईं का असली मकसद था लोगो में इस्लाम को बढ़ाना, इसका एक उदाहरण साईं सत्चरित्र में है की साईं के पास एक पोलिस वाला आता है जिसे साईं मार मार भगाने की बात कहता है,

अब असल में हुआ ये की एक पंडित जी ने अपने पुत्र को शिक्षा दिलवाने के लिए साईं को सोंप दिया पर साईं ने उसका खतना कर दिया जब पंडित जी को पता चला तो उन्होंने कोतवाली में रिपोर्ट कर दी, साईं को पकड़ने के लिए एक पुलिस वाला भी आया जिसे साईं ने मार कर भगाने की बात कही थी,
ये तभी की फोटो है जब पुलिस वाला साईं को पकड़ने गया था और साईं बुरका पहन कर भागा था
शेयर करे और इस जिहादी साईं की असली सच्चाई सभी को बताये  l

Admin
मेरा साई बाबा से कोई
निजी दुष्मनी नही है ।

परतुं हिन्दू धर्म को नाश हो रहा है, इसलिए मै
कुछ सवाल करना चाहता हू,
हिन्दू धर्म एक सनातन धर्म है, लेकिन लोग
आज कल लोग इस बात से परिचित नही है क्या
जब भारत मे अंग्रेजी सरकार अत्याचार , और
और सबको मौत के घाट उतार रहे थे तब साई बाबा ने

कौन से
ब्रिटिश अंग्रेजो के साथ आंदोलन
किया ? जिदंगी भिख मांगने मे कट गई?
मस्जिद मे रह कर कुरान पढना जरूरी था.
बकरे हलाल करना क्या जरूरी था ?
सब पाखंड है, पैसा कमाने का जरिया है।
ऐसा कौन सा दुख है कि उसे भगवान दूर नही
कर सकते है, श्रीमतभगवत
गीता मे लिखा है कि
श्मशान और समाधि की पुजा करने वाले मनुष्य
राक्षस योनी को प्राप्त होते है

साई जैसे पाखंडी की आज इतनी ज्यादा मार्केटिंग हो गयी है कि हमारे हिन्दू भाई बहिन आज अपने मूल धर्म से अलग होकर साई मुल्ले कि पूजा करने लगे है। आज लगभग हर मंदिर में इस जिहादी ने कब्जा कर लिया है। हनुमान जी ने हमेशा सीता राम कहा और आज के मूर्ख हिन्दू हुनमान जी का अपमान करते हुए सीता राम कि जगह साई राम कहने लगगए । बड़ी शर्म कि बात है। आज जिसकी मार्केटिंग ज्यादा उसी कि पूजा हो रही है। इसी लिए कृष्ण भगवान ने कहा था कि कलयुग में इंसान पथ और धर्म दोनों से भ्रष्ट हो जाएगा। 100 मे से 99 को नहीं पता साई कौन था इसने कौन सी किताब लिखी क्या उपदेश दिये पर फिर भी भगवान बनाकर बैठे है।

साई के माँ बाप का सही सही पता नहीं पर मूर्खो को ये पता है कि ये किस किस के अवतार है। अंग्रेज़ो के जमाने मे मूर्खो के साई भगवान पैदा होकर मर गए पर किसी भी एक महामारी भुखमरी मे मदद नहीं की। इनके रहते भारत गुलाम बना रहा पर इन महाशय को कोई खबर नहीं रही। शिर्डी से कभी बाहर नहीं निकले पर पूरे देश मे अचानक इनकी मौत के 90-100 साल बाद इनके मंदिर कुकरमूतते की तरह बनने लगे। चालीसा हनुमान जी की हुआ करती थी आज साई की हो गयी। राम सीता के हुआ करते थे। आज साई ही राम हो गए। श्याम राधा के थे आज वो भी साई बना दिये गए। ब्रहस्पति दिन विष्णु भगवान का होता था आज साई का मनाया जाने लगा। भगवान की मूर्ति मंदिरो में छोटी हो गयी और साई विशाल मूर्ति मे हो गए।

प्राचीन हनुमान मंदिर दान को तरस गए और साई मंदिरो के तहखाने तक भर गए। मूर्ख हिन्दुओ अगर दुनिया मे सच मे कलयुग के बाद भगवान ने इंसाफ किया तो याद रखना मुह छुपाने के लिए और अपनी मूर्ख बुद्धि पर तरस खाने के लिए कही शरण भी न मिलेगी। इसलिए भागवानो की तुलना मुल्ले साई से करके पाप मत करो। और इस लेख को पढ़ने के बाद भी न समझ मे आए तो अपना खतना करवाके मुसलमान बन जाओ।

यहाँ जरूर click करे !

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Friday, June 20, 2014

साईं भक्ति यानी भक्ति जिहाद।

सीधा सा प्रशन साईं के भगवान् होने का सबूत किस ग्रन्थ में है, सीधा जवाब दे...
साईं सत्चरित्र में कही नहीं लिखा की साईं भगवान् श्री राम के भक्त थे या उनका नाम जपते थे?? तो साईं के भक्त साईं राम क्यों कहते है ?
शिर्डी साईं बाबा संत है या भगवान्??? अगर भगवान् है तो कहाँ लिखा है, अगर संत है तो क्या एक संत को भगवान् की तरह पूजना ठीक है?
साईं बड़ा या राम, अगर राम से बड़ा राम का नाम तो उनके साथ एक यवनी(मुसलमान) का नाम क्यों जोड़ा जा रहा है?
कोई कहता है शिर्डी साईं शिव का अवतार, कोई कहता है राम जी का भक्त, कुछ दत्तात्रेय का अवतार कहते है, क्या कोई बता सकता है की ऐसा कंफ्यूजन क्या श्री राम या श्री कृष्ण के बारे में है ?
हमने राम नाम पैदा होते ही सुना है, पर साईं का नाम आपने कब सुना?
कृपया इमानदारी से बताये. साईं सत्चरित्र लिखने वाले लेखक श्री गोबि द राव रघुनाथ दाभोलकर (हेमाडपंत) हिन्दू थे मुसलमान?
शिर्डी के साईं बाबा उर्फ़ चाँद मियां उर्फ़ अब्दुल रहीम, ये हिन्दू थे या मुस्लिम?
कोई शिर्डी साईं को संत कह रहा है, कोई राम जी का भक्त तो कोई शिव का अवतार, जिसके बारे में सही से नहीं पता उसे लोग क्यों जबरदस्ती भगवान् बना रहे है?
क्या आप साईं भक्त है, अगर हाँ तो आपके लिए मांस खाना अनिवार्य है, क्यूंकि साईं बाबा प्रसाद में मांस मिलाते थे और भक्तो को बाँटते थे..
हम गुरुवार(ब्रहस्पतिवार)को किस देवता की पूजा करते हैं?
साईं सत्चरित्र में साफ़ साफ़ लिखा है की सब केवल अल्लाह मालिक बोलता था, कही भी ये वर्णित नहीं है की साईं ने ॐ बोला या राम, फिर साईं के मुर्ख भक्त ॐ साईं राम क्यों बोलते है, क्यों एक यावनी, मुसलमान को ज़बरदस्ती हिन्दू बनाने का एक घोर षड्यंत्र चल रहा है ?
साईं भक्त स्पष्ट करे, वो भी प्रमाण के साथ गीता में भगवान् कृष्ण कहते है की कलयुग में धर्म के अर्थ ही बदल जायेंगे, अब तक जहा केवल धर्म और अधर्म होता था कल्युग में धर्म तो रहेगा पर अधर्म भी स्वयं को धर्म कहेगा और हजारो धर्म बन जायेंगे साथ ही ऐसे दुष्ट लोग भी होंगे जो स्वयं को भगवान् और इश्वर कहेंगे, पर मैं ही इश्वर हु, मैं ही परब्रह्म हु और मैं ही सत्य हु, मुझे में सर्व्व्यपर्क और सब कुछ मुझसे ही उत्पन्न होता है और मुझमें समां जाता है, दूसरी तरफ शिर्डी के साईं बाबा जो साईं सत्चरित्र में हर जगह केवल अल्लाह मालिक कहते है, अब ये अल्लाह कौन है कोई साईं भक्त बतायेगा, क्या अल्लाह को मालिक कहना ये हमारे भगवान् श्री कृष्ण का अपमान नहीं है ?

ऐसे में आप बताये साईं सच्चा है या भगवान् कृष्ण, सच्चा तो एक ही होगा न इनमे से,,, साँईँ के चमत्कारिता के पाखंड और झूठ का ता चलता है, उसके "साँईँ चालिसा" से। आईये पहले चालिसा का अर्थ जान लेते है:- "हिन्दी पद्य की ऐसी विधा जिसमेँ चौपाईयोँ की संख्या मात्र 40 हो, चालिसा कहलाती है।" क्या आपने कभी गौर किया है?.

कि साँईँ चालिसा मेँ कितनी चौपाईयाँ हैँ?  यदि नहीँ, तो आज ही देखेँ.... जी हाँ, कुल 100 or 200. तनिक विचारेँ क्या इतने चौपाईयोँ के होने पर भी उसे चालिसा कहा जा सकता है? नहीँ न?..... बिल्कुल सही समझा आप.... जब इन व्याकरणिक व आनुशासनिक नियमोँ से इतना से इतना खिलवाड़ है, तो साईँ के झूठे पाखंडवादी चमत्कारोँ की बात ही कुछ और है! कितने शर्म की बात है कि आधुनिक विज्ञान के गुणोत्तर प्रगतिशिलता के बावजूद लोग साईँ जैसे महापाखंडियोँ के वशिभूत हो जा रहे हैँ॥ हिन्दुओ का सबसे बड़ा खतरा भी मोमिनो यानि मुसलमानों से है !  करोडो हिन्दू अपना माथा एक मोमिन की ह चौखट पर रगड रहे है !  शिर्डी वाले साईं महाराज एक मोमिन है ! " गोपीचंदा मंदा त्वांची उदरिले ! मोमिन वंशी जन्मुनी लोंका तारिले !" ( शिर्डी साईं मंदिर की तथाकथित "आरती का अंश ") क्या ये सब बाते आप को मालूम नहीं है ? या सब कुछ जानते हुए भी अपने सनातन धर्म के साथ एक मोमिन का नाम जुड़ना देखना चाहते है ? 

कल की ही एक घटना है, सत्य, इसमें मिलावट कुछ नहीं है,, कल मैं सुबह ऑफिस जा रहा था, रास्ते में एक मंदिर है जिसकी दिवार पर भगवानो की फोटो वाली टाइल्स लगी हुई है, मैंने देखा की एक आदमी आगे जा रहा था और वो केवल साईं के आगे झुका और चल दिया बाकी किसी भी सनातनी भगवान् के आगे उसने सर नहीं झुकाया, वो थोडा और आगे गया और एक और साईं की टाइल को छुआ और आगे फिर यही करता रहा, तीन टाइल छूने के बाद मैं भाग कर उसके पास गया और पूछा आपने साईं को प्रणाम किया पर बाकी अपने भगवानो को क्यों नहीं, उन्होंने कहा की अपनी अपनी श्रद्धा है, मैंने कहा वाह श्रद्धा में भी भेदभाव, फिर मैंने उनसे पूछा आपने साईं सत्चरित्र पढ़ी है, उन्होंने कहा नहीं, मैंने कहा पढ़िए और 22, 23 और 38 अध्याय जरुर पढ़े, उसे पढने के बाद मेरा विश्वास ह ै की आप साईं को भगवान् मानना बंद कर देंगे, अब वो महाशय आगे तो बढे पर आगे साईं की किसी टाइल को नहीं छुआ, ये है समझदार इंसान की पहचान जो पहले विश्लेषण करता है,,, अगर कोई मुर्ख होता तो वही मुझे पकड़ लेता और,,,,

साँई के अन्धभक्त अंधश्रध्दा मेँ डूबकर कहते हैँ कि "साँईं न तो हिन्दू हैँ और न ही मुस्लिम"। परन्तु वे इस बात का प्रत्य त्तर तो देँ:- 'श्री साँई बाबा संस्थान विश्वस्त व्यवस्था' से प्रकाशित साँईँ के जीवन की एकमात्र प्रामाणिक पुस्तक "साँईं सत्चरित्र" के 'अध्याय 28' के पृष्ठ 197 पर स्पस्ट वर्णन है कि..... {वे गर्जन कर कहने लगे की इसे बाहर निकाल दो, फिर मेधा की ओर देखकर साँईँ यह कहने लगे कि 'तुम तो एक उच्च कुलीन ब्राह्मण हो और मैँ एक निम्न जाति का एक यवन(मुसलमान) } अर्थात्‌ यहाँ साँईं स्वयं का मुसलमान होना कबूल करता है। साईं सत्चरित्र में कही भी ऐसा नहीं लिखा है की साईं बाबा ॐ जपते थे ये राम का नाम लेते थे, तो फिर साईं के भक्त ॐ साईं राम क्यों लिखते है या बोलते है, यही नहीं साईं सत्चरित्र में १४ जगह पर साईं ने कहा अल्लाह मालिक, साथ ही वे कहते थे सबका मालिक एक, और उसके कहने के दो चार सेकंड बाद ही कहते थे अल्लाह मालिक, तो आखिर क्यों उन्हें सनातन धर्म में जबरदस्ती घुसाया जा रहा है ?

कौन सी है वो ताकते जो हमारे ही धर्म को दूषित कर रही है ?  मैंने अधिकतर साईं भक्तो को देखा है जो शिर्डी साईं की अंधभक्ति करते है, पर ऐसे अंधभक्तो को एक आँख खोलने वाला उपाय बता रहा, कृपया करके आप साईं सत्चरित्र जरुर पढ़े तीसरे अध्याय तक आप साईं को मानना ही छोड़ देंगे यदि आप शाकाहारी है, अगले अध्यायों में आप 22, 23 और 38 अध्याय पढ़ कर तो बस क्या कहू, अगर बुद्धि होगी और दिमाग की बत्ती जल होगी तो इस साईं नाम के राक्षस को अपने जीवन से निकल कर बाहर फेंक देंगे और बकियों को भी बचाने की सोचेंगे, पर अगर मुर्ख होंगे तो ही आप साईं ही भक्ति करेंगे, आज के समय में हिन्दुओ के पतन का सबसे बड़ा कारण साईं ही है, इसलिए जितने भी साईं भक्त है उनसे मेरी प्रार्थना है की साईं सत्चरित्र अवश्य पढ़े,,, ये आपकी अंधश्रद्धा नहीं बल्कि आपके लाखो साल पुराने सनातन धर्म के अस्तित्व का प्रशन है जो आपकी मुर्खता के कारण पतन की और जा रहा है, अगर आप अब भी नहीं संभले तो आपके आने वाली संताने खतना करा कर नमाज पढ़ती नजर आयेंगी,, इसलिए पढ़े और जागे..... असतो मा सद्गमयः तमसो मा ज्योतिर्गमयः (हे परमेश्वर! हमेँ बुराई से अच्छाई, व अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो)

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जैसे सूर्य आकाश में छिपकर नहीं रह सकता, वैसे ही मार्ग दिखलाने वाले महापुरुष भी संसार में छिप कर नहीं रह सकते। वेदव्यास (महाभारत, वनपर्व)) यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपिमाम् गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भूत प्रेत, मूर्दा (खुला या दफ़नाया हुआ अर्थात् कब्र अथवा समाधि) को सकामभाव से पूजने वाले स्वयं मरने के बाद भूत-प्रेत ही बनते हैं. जैसे की ये साईं

Jai Hind...

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Friday, June 7, 2013

साईं का पर्दाफाश :




आज आर्यावर्त मेँ तथाकथित भगवानोँ का एक दौर चल पड़ा है। यह संसार अंधविश्वास और तुच्छ ख्याति- सफलता के पीछे भागने वालोँ से भरा हुआ है।
“यह विश्वगुरू आर्यावर्त का पतन ही है कि आज परमेश्वर की उपासना की अपेक्षा लोग गुरूओँ, पीरोँ और कब्रोँ पर सिर पटकना ज्यादा पसन्द करते हैँ।”

आजकल सर्वत्र साँई बाबा की धूम है, कहीँ साँई चौकी, साँई संध्या और साँई पालकी मेँ मुस्लिम कव्वाल साँई भक्तोँ के साथ साँई जागरण करने मेँ लगे हैँ। मन्दिरोँ मेँ साँई की मूर्ति सनातन काल के देवी देवताओँ के साथ सजी है। मुस्लिम तान्त्रिकोँ ने भी अपने काले इल्म का आधार साँई बाबा को बना रखा है व उनकी सक्रियता सर्वत्र देखी जा सकती है। इन सबके बीच साँई बाबा को कोई विष्णु का ,कोई शिव का तथा कोई दत्तात्रेय का अवतार बतलाता है।

साईँ के जीवनचरित्र की एकमात्र प्रामाणिक उपलब्ध पुस्तक है- “साँईँ सत्चरित्र”॥

इस पुस्तक के अध्ययन से साईँ के जिस पवित्र चरित्र का अनुदर्शन होता है,
क्या आप उसे जानते हैँ?

चाहे चीलम पीने की बात हो, चाहे स्त्रियोँ को अपशब्द कहने की?
चाहे माँसाहार की बात हो, या चाहे धर्मद्रोही, देशद्रोही व इस्लामी कट्टरपन की….

इन सबकी दौड़ मेँ शायद ही कोई साँई से आगे निकल पाये। यकीन नहीँ होता न?
तो आइये चलकर देखते हैँ…

]साँई माँसाहार का प्रयोग करता था व स्वयं जीवहत्या करता था?
प्रमाण:-
(1)मस्जिद मेँ एक बकरा बलि देने के लिए लाया गया। वह अत्यन्त दुर्बल और मरने वाला था। बाबा ने उनसे चाकू लाकर बकरा काटने को कहा।
-:अध्याय 23. पृष्ठ 161.

(2)तब बाबा ने काकासाहेब से कहा कि मैँ स्वयं ही बलि चढ़ाने का कार्य करूँगा।
-:अध्याय 23. पृष्ठ 162.

(3)फकीरोँ के साथ वो आमिष(मांस) और मछली का सेवन करते थे।
-:अध्याय 5. व 7.

(4)कभी वे मीठे चावल बनाते और कभी मांसमिश्रित चावल अर्थात् नमकीन पुलाव।
-:अध्याय 38. पृष्ठ 269.

(5)एक एकादशी के दिन उन्होँने दादा कलेकर को कुछ रूपये माँस खरीद लाने को दिये। दादा पूरे कर्मकाण्डी थे और प्रायः सभी नियमोँ का जीवन मेँ पालन किया करते थे।
-:अध्याय 32. पृष्ठः 270.

(6)ऐसे ही एक अवसर पर उन्होने दादा से कहा कि देखो तो नमकीन पुलाव कैसा पका है? दादा ने योँ ही मुँहदेखी कह दिया कि अच्छा है। तब बाबा कहने लगे कि तुमने न अपनी आँखोँ से ही देखा है और न ही जिह्वा से स्वाद लिया, फिर तुमने यह कैसे कह दिया कि उत्तम बना है? थोड़ा ढक्कन हटाकर तो देखो। बाबा ने दादा की बाँह पकड़ी और बलपूर्वक बर्तन मेँ डालकर बोले -”अपना कट्टरपन छोड़ो और थोड़ा चखकर देखो”।
-:अध्याय 38. पृष्ठ 270.

प्रश्न:-
{1}क्या साँई की नजर मेँ हलाली मेँ प्रयुक्त जीव ,जीव नहीँ कहे जाते?{2}क्या एक संत या महापुरूष द्वारा क्षणभंगुर जिह्वा के स्वाद के लिए बेजुबान नीरीह जीवोँ का मारा जाना उचित होगा?{3}सनातन धर्म के अनुसार जीवहत्या पाप है।
तो क्या साँई पापी नहीँ?{4}एक पापी जिसको स्वयं क्षणभंगुर जिह्वा के स्वाद की तृष्णा थी, क्या वो आपको मोक्ष का स्वाद चखा पायेगा?{5}तो क्या ऐसे नीचकर्म करने वाले को आप अपना आराध्य या ईश्वर कहना चाहेँगे?


{1}साँई जिन्दगी भर एक मस्जिद मेँ रहा, क्या इससे भी वह मुस्लिम सिध्द नहीँ हुआ? यदि वह वास्तव मेँ हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक होता तो उसे मन्दिर मेँ रहने मेँ क्या बुराई थी?{2}सिर से पाँव तक इस्लामी वस्त्र, सिर को हमेशा मुस्लिम परिधान कफनी मेँ बाँधकर रखना व एक लम्बी दाढ़ी, यदि वो हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक होता तो उसे ऐसे ढ़ोँग करने की क्या आवश्यकता थी?
क्या ये मुस्लिम कट्टरता के लक्षण नहीँ हैँ?{3}वह जिन्दगी भर एक मस्जिद मेँ रहा, परन्तु उसकी जिद थी की मरणोपरान्त उसे एक मन्दिर मेँ दफना दिया जाये, क्या ये न्याय अथवा धर्म संगत है? “ध्यान रहे ताजमहल जैसी अनेक हिन्दू मन्दिरेँ व इमारते ऐसी ही कट्टरता की बली चढ़ चुकी हैँ।”{4}उसका अपना व्यक्तिगत जीवन कुरान व अल-फतीहा का पाठ करने मेँ व्यतीत हुआ, वेद व गीता नहीँ?, तो क्या वो अब भी हिन्दू मुस्लिम एकता का सूत्र होने का हक रखता है?{5}उसका सर्वप्रमुख कथन था “अल्लाह मालिक है।”परन्तु मृत्युपश्चात् उसके द्वितीय कथन “सबका मालिक एक है” को एक विशेष नीति के तहत सिक्के के जोर पर प्रसारित किया गया। यदि ऐसा होता तो उसने ईश्वर-अल्लाह के एक होने की बात क्योँ नहीँ की?

फकीरों के साथ वो मांस और मच्छली का सेवन करते थे. कुत्ते भी उनके भोजन पत्र में मुंह डालकर स्वतंत्रता पूर्वक खाते थे.(अध्याय 7 साईं सत्चरित्र ) अपने स्वार्थ वश किसी प्राणी को मारकर खाना किसी इश्वर का तो काम नहीं हो सकता और कुत्तों के साथ खाना खाना किसी सभ्य मनुष्य की पहचान भी नहीं है.

अमुक चमत्कारों को बताकर जिस तरह उन्हें भगवान् की पदवी दी गयी है इस तरह के चमत्कार तो सड़कों पर जादूगर दिखाते हें . काश इन तथाकथित भगवान् ने इस तरह की जादूगरी दिखने की अपेक्षा कुछ सामाजिक उत्तथान और विश्व की उन्नति एवं समाज में पनप रहीं समस्याओं जैसे बाल विवाह सती प्रथा भुखमरी आतंकवाद भास्ताचार अआदी के लिए कुछ कार्य किया होता!


साई को अगर ईश्वर मान बैठे हो अथवा ईश्वर का अवतार मान बैठे हो तो क्यो?आप हिन्दू है तो सनातन संस्कृति के किसी भी धर्मग्रंथ में साई महाराज का नाम तक नहीं है।तो धर्मग्रंथो को झूठा साबित करते हुये किस आधार पर साई को भगवान मान लिया ?( और पौराणिक ग्रंथ कहते है कि कलयुग में दो अवतार होने है ….एक भगवान बुद्ध का हो चुका दूसरा कल्कि नाम से अंतिम चरण में होगा……. ।){ वेदों में तो अवतारवाद नहीं हैं |}




अगर साई को संत मानकर पूजा करते हो तो क्यो? क्या जो सिर्फ अच्छा उपदेश दे दे या कुछ चमत्कार दिखा दे वो संत हो जाता है?साई 

महाराज कभी गोहत्या पर बोले?, साई महाराज ने उस समय उपस्थित कौन सी सामाजिक बुराई को खत्म किया या करने का प्रयास किया |

अगर आप पौराणिक हो और अगर मनोकामना पूर्ति के लिए साई के भक्त बन गए हो तो तुम्हारी कौन सी ऐसी मनोकामना है जो कि भगवान शिवजी , या श्री विष्णु जी, या कृष्ण जी, या राम जी पूरी नहीं कर सकते सिर्फ साई ही कर सकता है?तुम्हारी ऐसी कौन सी मनोकामना है जो कि वैष्णो देवी, या हरिद्वार या वृन्दावन, या काशी या बाला जी में शीश झुकाने से पूर्ण नहीं होगी ..वो सिर्फ शिरडी जाकर माथा टेकने से ही पूरी होगी।


ॐ साई राम ……..ॐ हमेशा मंत्रो से पहले ही लगाया जाता है अथवा ईश्वर के नाम से पहले …..साई के नाम के पहले ॐ लगाने का अधिकार कहा से पाया? जय साई राम ………. श्री मे शक्ति माता निहित है ….श्री शक्तिरूपेण शब्द है ……. जो कि अक्सर भगवान जी के नाम के साथ संयुक्त किया जाता है ……. तो जय श्री राम में से …..श्री तत्व को हटाकर ……साई लिख देने में तुम्हें गौरव महसूस होना चाहिए या शर्म आनी चाहिये?


संत वही होता है जो लोगो को भगवान से जोड़े , संत वो होता है जो जनता को भक्तिमार्ग की और ले जाये , संत वो होता है जो समाज मे व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए पहल करे … इस साई नाम के मुस्लिम पाखंडी फकीर ने जीवन भर तुम्हारे राम या कृष्ण का नाम तक नहीं लिया , और तुम इस साई की काल्पनिक महिमा की कहानियो को पढ़ के इसे भगवान मान रहे हो … कितनी भयावह मूर्खता है ये ….महान ज्ञानी ऋषि मुनियो के वंशज आज इतने मूर्ख और कलुषित बुद्धि के हो गए है कि उन्हे भगवान और एक साधारण से मुस्लिम फकीर में फर्क नहीं आता ?




यह संसार अंधविश्वास और तुच्छ ख्यादी एवं सफलता के पीछे भागने वालों से भरा पड़ा हुआ है. दयानंद सरस्वती, महाराणा प्रताप, शिवाजी, सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, सरीखे लोग जिन्होंने इस देश के लिए अपने प्राणों को न्योच्चावर कर दीये लोग उन्हिएँ भूलते जा रहे हैं और साईं बाबा जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम में न कोई योगदान दिया न ही सामाजिक सुधार में कोई भूमिका रही उनको समाज के कुछ लोगों ने भगवान् का दर्जा दे दिया है. तथा उन्हें योगिराज श्री कृष्ण और मायादापुरुशोत्तम श्री राम के अवतार के रूप में दिखाकर न केवल इन महापुरुषों का अपमान किया जा रहा अपितु नयी पीडी और समाज को अवनति के मार्ग की और ले जाने का एक प्रयास किया जा रहा है.

आवश्यकता इस बात की है की है की समाज के पतन को रोका जाये और जन जाग्रति लाकर वैदिक महापुरुषों को अपमानित करने की जो कोशिशे की जा रही, उनपर अंकुश लगाया जाये.



मैंने अधिकतर साईं भक्तो को देखा है जो शिर्डी साईं की अंधभक्ति करते है, पर ऐसे अंधभक्तो को एक आँख खोलने वाला उपाय बता रहा, कृपया करके आप साईं सत्चरित्र जरुर पढ़े तीसरे अध्याय तक आप साईं को मानना ही छोड़ देंगे यदि आप शाकाहारी है, अगले अध्यायों में आप 22, 23 और 38 अध्याय पढ़ कर तो बस क्या कहू, अगर बुद्धि होगी और दिमाग की बत्ती जल होगी तो इस साईं नाम के राक्षस को अपने जीवन से निकल कर बाहर फेंक देंगे और बकियों को भी बचाने की सोचेंगे, पर अगर मुर्ख होंगे तो ही आप साईं ही भक्ति करेंगे, आज के समय में हिन्दुओ के पतन का सबसे बड़ा कारण साईं ही है, इसलिए जितने भी साईं भक्त है उनसे मेरी प्रार्थना है की साईं सत्चरित्र अवश्य पढ़े,,, ये आपकी अंधश्रद्धा नहीं बल्कि आपके लाखो साल पुराने सनातन धर्म के अस्तित्व का प्रशन है जो आपकी मुर्खता के कारण पतन की और जा रहा है, अगर आप अब भी नहीं संभले तो आपके आने वाली संताने खतना करा कर नमाज पढ़ती नजर आयेंगी,, इसलिए पढ़े और जागे..... असतो मा सद्गमयः तमसो मा ज्योतिर्गमयः (हे परमेश्वर! हमेँ बुराई से अच्छाई, व अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो)


जैसे सूर्य आकाश में छिपकर नहीं रह सकता, वैसे ही मार्ग दिखलाने वाले महापुरुष भी संसार में छिप कर नहीं रह सकते। वेदव्यास (महाभारत, वनपर्व)) यान्ति देवव्रता देवान् पितृन्यान्ति पितृव्रताः भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपिमाम् गीता में भी भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि भूत प्रेत, मूर्दा (खुला या दफ़नाया हुआ अर्थात् कब्र अथवा समाधि) को सकामभाव से पूजने वाले स्वयं मरने के बाद भूत-प्रेत ही बनते हैं. जैसे की ये साईं

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