Monday, April 15, 2013

हिंदू औरतें बोलीं, 'वे जबरन कलमा पढ़वाते हैं':

'मुझे जान से मार दो मगर पाकिस्तान वापस मत भेजो...'। कुछ ऐसा कहते हुए रो पड़े पाकिस्तानी हिंदू। कभी अपने वतन से बेहद प्यार करने वाले ये ‌लोग अब वहां नहीं जाना चाहते।

दक्षिणी दिल्ली के बिजवासन इलाके में रह रहे 479पाकिस्तानी हिंदुओं का जत्‍था करीब महीने भर पहले भारत तीर्थयात्रा पर आया था। पाकिस्तान में अपने साथ हो रहे अत्याचार और सरकारी उपेक्षा की वजह से अब वे वहां जाने को बिल्कुल तैयार नहीं हैं।

वीजा नहीं, नागरिकता की मांग
हालांकि इन लोगों के लिए राहत की बात यह है कि भारत सरकार ने 8 अप्रैल को खत्‍म हो रहे उनके वीजा अवधि को एक महीने को बढ़ा दिया गया है। लेकिन उन्हें अभी भी अपने भविष्य की चिंता है। इन लोगों की मांग है कि उन्हें भारतीय नागरिकता मिले।

इन हिंदुओं में कुछ लोगों ने जब मीडिया से अपना दर्द साझा किया तो माहौल गमगीन हो गया। एक औरत ने बताया कि पाकिस्तान में उनके साथ बेइंतहा जुल्म किए जाते हैं। वहां उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने की आजादी नहीं है। मजबूरी में उन्हें अपने बच्चों को मदरसे में पढ़ाना पड़ता है।

कुछ औरतों ने बताया, ''हमें हिंदी नहीं कलमा पढ़ने को बोला गया है। अब वहां रहने का बिल्कुल माहौल नहीं है।
पाकिस्तान में हमारे साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। लूटपाट और डकैती तो आम बात है।''

दिल्ली में खानाबदोश की जिंदगी जी रहे इन लोगों को बस इतना संतोष है कि वे यहां सु‌रक्षित हैं।

हिंदू होने कि सजा :




अश्विनी कुमार

 (एडिटर पंजाब केसरी):


वरिष्ठ पत्रकार खुशवंत सिंह की प्रसिद्ध पुस्तक 'ट्रेन टु पाकिस्तान' में विभाजन की त्रासदी और तकलीफों को बहुत ही भावनात्मक तरीके से बयान किया गया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की थी कि भविष्य में ऐसा कभी नहीं होगा लेकिन जब मैंने पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हिन्दू परिवारों की दास्तान सुनी तो मैंने महसूस किया कि मोहम्मद अली जिन्ना से लेकर आसिफ अली जरदारी तक पाकिस्तान से आने वाली ट्रेन कभी नहीं रुकी। आजादी के बाद से ही पाकिस्तान से हिन्दू परिवारों का भारत आना जारी रहा लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पाकिस्तान में रह रहे हिन्दू, अहमदिया, सिख और ईसाई परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं और जाहिर है कि हिन्दू और सिख परिवार जब भी आएंगे भारत ही आएंगे। इस बार कुम्भ का स्नान करने के लिए वीजा लेकर आए पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हिन्दू परिवार पाकिस्तान जाने की बजाय मर जाना पसंद कर रहे हैं। मीडिया द्वारा शोर मचाने पर बिजवासन में शरण लेकर बैठे इन परिवारों की वीजा अवधि सरकार ने एक माह और बढ़ा तो दी लेकिन यह समस्या का अस्थायी हल ही है। कोई भी व्यक्ति अपनी सम्पत्ति और रोजगार छोड़ कर दर-दर की ठोकरें खाने के लिए भारत क्यों आएगा लेकिन जब इन परिवारों पर अत्याचार हदें पार करने लगा तो उन्होंने पलायन करके भारत आना ही बेहतर समझा। पाकिस्तान में आतंकवाद और कट्टरवाद ने जो हालात पैदा किए हैं, वैसे तो उसमें एक सामान्य नागरिक जी ही नहीं सकता। वहां अल्पसंख्यकों को कोई ज्यादा अधिकार नहीं दिए जाते। उन्हें न तो धार्मिक आजादी है, न उनकी बहू-बेटियां सुरक्षित हैं। अल्पसंख्यकों को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। आखिरकार उनके पास एक ही रास्ता बचता है या तो वह भारत आ जाएं या फिर धर्म परिवर्तन कर घुट-घुट कर जीवन जीने को मजबूर हो जाएं।
यूं तो पाकिस्तान में भी मानवाधिकार आयोग है और कई ऐसे संगठन हैं जो मानवाधिकारों के लिए आवाज बुलंद करते रहे हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों में बढ़ौतरी की पुष्टिï की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि पाकिस्तान में हर महीने लगभग 25 हिन्दू लड़कियों का अपहरण हो जाता है। पाकिस्तान की प्रैस कराची और ब्लूचिस्तान में बलात्कार और धर्मांतरण की खबरें प्रकाशित करती रहती है। अल्पसंख्यकों के बच्चे स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा लेने को मजबूर हैं। पाकिस्तान की अल्पसंख्यक महिलाओं को तो एक तरफ यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है तो दूसरी तरफ वह अल्पसंख्यक होने का खामियाजा भुगतती हैं। एक महिला अपने तीन दिन के बेटे को दादा-दादी के पास छोड़कर यहां आई है। 15 वर्षीय बालिका तो अपनी अस्मिता को बचाने के लिए यहां आई। एक वृद्ध अपनी आंखों के सामने अपने घर की महिलाओं से बलात्कार होते नहीं देख सकते। इनका गुनाह केवल इतना है वह हिन्दू हैं।
विभाजन के समय पाकिस्तान नहीं जाने वाले मुस्लिम भारत में रह कर भाग्यशाली हैं क्योंकि यहां वह पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें पूरे अधिकार हैं। देश के शीर्ष पदों पर भी मुस्लिम आसीन रहे हैं। यदि पाकिस्तान की स्थापना के बुनियादी सिद्धांतों को देखा जाए तो इसमें वहां रहने वाले सभी धर्मों के लोगों को पूरी सुरक्षा, संरक्षण व सहयोग देने की बात कही गई थी, परन्तु धर्मांधता एवं धार्मिक कट्टïरवाद ने पाकिस्तान को आज इस मुकाम पर ला खड़ा किया है कि पूरी दुनिया में वह ऐसे देशों की सूची में सबसे ऊपर नजर आ रहा है। अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले रोकने में पुलिस और सरकार असहाय हो चुकी हैं। हिन्दुओं, सिखों, ईसाइयों के अलावा शिया हजारा समुदाय को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ब्लूचिस्तान, स्वात घाटी जैसे क्षेत्रों में लश्करे झांगवी तथा सिपाहे सहाबा के आतंकी सैकड़ों शिया समुदाय के लोगों की हत्याएं कर चुके हैं। ईसाई समुदाय के लोगों को तो पाक में मामूली मजदूरी का काम भी नहीं मिल पाता। वास्तव में कट्टरपंथी ताकतों के आगे हुक्मरानों ने हथियार डाल रखे हैं। यह सब होना ही था क्योंकि पाकिस्तान की बुनियाद ही सत्ता पाने की इच्छा शक्ति पर रखी गई थी और सत्ता की भूख बढऩे के कारण हर राजनीतिज्ञ कट्टरपंथी ताकतों से सांठगांठ करता रहा।
भारत को पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लगातार हनन को लेकर बड़ी भूमिका निभानी चाहिए थी लेकिन भारत की तथाकथित धर्मनिरपेक्ष ताकतों ने कुछ न करने की कूटनीति अपना रखी है। विडम्बना यह भी है कि देश की धर्मनिरपेक्ष ताकतें हिन्दुओं का सवाल आते ही अपना व्यवहार बदल लेती हैं। संसद में पाकिस्तान से आ रहे हिन्दू परिवारों को लेकर चर्चा भी हुई लेकिन सरकार ने किया कुछ नहीं। सारी दुनिया में मानवाधिकारों का ढिंढोरा पीटने वाला अमरीका पाक में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर बोलने को तैयार नहीं। अमरीका और संयुक्त राष्ट्र क्यों नहीं पाकिस्तान पर दबाव डालते कि वह अल्पसंख्यकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निवर्हन करे। हिन्दू बंगलादेश, भूटान से भी भगाए जा रहे हैं और भारत सरकार ने तथाकथित धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़ रखा है तो वह इन शरणार्थियों की क्या सुनेगी। इस देश में असम और कश्मीर के हिन्दुओं के हितों की बात करना भी मुसीबत हो चुकी है। लगता है यह देश शरणार्थियों का देश बनकर रह जाएगा। क्या पाक से लौटे परिवारों को नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए? क्या वह उम्र भर खानाबदोशों की जिन्दगी जीने को ही मजबूर रहेंगे?


नोट: अगर आप पाकिस्तान से आये इन हिंदू भाइयो बहनों, माताओं और बच्चों का कुछ सहयोग करना चाहते हैं तो कृपया जरुर सम्पर्क करें: 09996541063, 01275259734

Sunday, April 7, 2013

बाप रे बाप

इधर भी 'आप', उधर भी 'आप', 'आप' के जलवे 'बाप रे बाप'। 'आप' को भाते मुल्ला-टोपी, भगवा से घबराते 'आप'। वंदे-मातरम सांप्रदायिक है, माँ भारती से कतराते 'आप'। कश्मीर में जनमत करवाते, पंडितों को भूल जाते 'आप'। लोकपाल पर अन्शन करते, और फ़िर पलटी खाते 'आप'। देश की जनता भोली-भाली, इसको मूर्ख बनाते 'आप'। इधर भी 'आप', उधर भी 'आप', 'आप' के जलवे 'बाप रे बाप'

अजीबो गरीब किस्से

दुमास बीच (गुजरात) – इस बीच पर हिंदुओं के शवों का दाह-संस्कार किया जाता है. यहां कई बार असाधारण और हॉरर गतिविधियां महसूस की गई हैं. यहां आने वाले लोगों को अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती हैं जबकि आस-पास कोई नहीं होता. ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र में हर ओर मरे हुए लोगों की उपस्थिति रहती है.

रामोजी फिल्मसिटी (हैदराबाद) – यह स्थान कुख्यात और अमानवीय सैनिकों का कब्रिस्तान है. यहां उनकी आत्मा आज भी भटकती है. मृत सैनिक यहां आने वाले लोगों को बहुत परेशान करते हैं. कई बार लाइटमैन और कैमरा मैन गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं. स्थानीय लोग यहां आने से घबराते हैं लेकिन व्यवसाय को हानि ना पहुंचे इसीलिए आत्माओं की कहानियों को निराधार बताता जाता रहा है.
राज किरन होटल (मुंबई) – लोनावला, मुंबई स्थित राज किरन होटल में एक कमरा आत्माओं की चपेट में है. जिन लोगों ने वहां रहने की हिम्मत दिखाई है उनका कहना है कि रात के समय कोई उनकी चादर खींचता है और अजीबोगरीब आवाजें निकालता है. कभी-कभार उन्हें घायल करने की कोशिश भी की गई है.

सवॉय होटल (मसूरी) – अंग्रेजी शासन काल में इस होटल में एक ब्रिटिश लड़की की हत्या की गई थी जिसकी आत्मा आज भी अपने हत्यारे को ढूंढ़ रही है. इस स्थान को सीरियल किलिंग से भी जोड़कर देखा जाता है लेकिन अधिकांश लोगों का मानना है कि इन हत्याओं के पीछे उसी लड़की लेडी ऑर्मे का हाथ है.

शनीवारवाडा किला (पुणे) – जब पश्चिम भारतीय प्रांत पर पेशवाओं का अधिकार था उस समय पेशवाओं के उत्तराधिकारी नारायण नामक बालक की उसके चाची के आदेशानुसार हत्या करवा दी गई थी. अपनी जान बचाने के लिए नारायण पूरे महल में घूमता रहा लेकिन फिर भी उसके हत्यारों ने उसे ढूंढ़ कर मार डाला. वह अपने चाचा को आवाज लगाता रहा पर कोई उसकी मदद के लिए नहीं आया. स्थानीय लोगों ने आज भी कई बार उसकी कराहने की आवाजें सुनी हैं. चांदनी रात में वह जगह और अधिक भयानक हो जाती है.

डॉ हिल्स (पश्चिम बंगाल) – इस घने जंगल में ना जाने कितनी ही हत्याएं हो चुकी हैं. स्थानीय लोगों ने कई बार यहां अजीबोगरीब चीजें महसूस की हैं. विक्टोरिया ब्वॉयस स्कूल में छुट्टियों के दिनों में हलचल और लोगों की आत्माओं की उपस्थिति दर्ज की गई है.

डिसुजा चाल (मुंबई) – माहिम, मुंबई में स्थित डिसुजा चॉल के पास एक कुआं है. कहा जाता है कि इस कुएं में पानी भरते हुए एक महिला डूब कर मर गई थी. आज भी उस महिला की आत्मा उस कुएं और चॉल में घूमती है. वह किसी को परेशान नहीं करती लेकिन उसे अभी तक मुक्ति नहीं मिल पाई है.

बृज राज भवन (कोटा) – 1857 की लड़ाई में ब्रिटिश सैन्य अफसर मेजर बर्टन की हत्या इसी महल में की गई थी जिसकी आत्मा रात के समय यहां भटकती है और चौकीदारों को परेशान करती है.