Wednesday, August 14, 2013

सुन नापाक पाक

भारत तुझको नमस्कार है।


भारत तुझसे मेरा नाम है,
भारत तू ही मेरा धाम है।
भारत मेरी शोभा शान है,
भारत मेरा तीर्थ स्थान है।
भारत तू मेरा सम्मान है,
भारत तू मेरा अभिमान है।
भारत तू धर्मों का ताज है,
भारत तू सबका समाज है।
भारत तुझमें गीता सार है,
भारत तू अमृत की धार है।
भारत तू गुरुओं का देश है,
भारत तुझमें सुख संदेश है।
भारत जबतक ये जीवन है,
भारत तुझको ही अर्पण है।
भारत तू मेरा आधार है,
भारत मुझको तुझसे प्यार है।
भारत तुझपे जां निसार है,
भारत तुझको नमस्कार है।

-अशोक कुमार वशिष

Tuesday, July 30, 2013

जागो रे।

जागो रे
एक राजा था जिसकी प्रजा हम भारतीयों की तरह सोई हुई थी ! बहुत से तीस मार खां लोगों ने कोशिश की प्रजा जग जाए .. अगर कुछ गलत हो रहा है  तो उसका विरोध करे, लेकिन प्रजा को कोई फर्क नहीं पड़ता था !

राजा ने तेल के दाम बढ़ा दिये प्रजा चुप रही
राजा ने अजीबो गरीब टेक्स लगाए प्रजा चुप रही
राजा ज़ुल्म करता रहा लेकिन प्रजा चुप रही

एक दिन राजा के दिमाग मे एक बात आई उसने एक अच्छे-चौड़े रास्ते को खुदवा के एक पुल बनाया .. जबकि वहां पुल की कतई ज़रूरत नहीं थी .. प्रजा फिर भी चुप थी किसी ने नहीं पूछा के भाई यहा तो किसी पुल की ज़रूरत नहीं है आप काहे बना रहे है ?

राजा ने अपने सैनिक उस पुल पे खड़े करवा दिए और पुल से गुजरने वाले हर व्यक्ति से टेक्स लिया जाने लगा फिर भी किसी ने कोई विरोध नहीं किया ! फिर राजा ने अपने सैनिको को हुक्म दिया कि जो भी इस पुल से गुजरे उसको 4 जूते मारे जाए और एक शिकायेत पेटी भी पुल पर रखवा दी कि किसी को अगर कोई शिकायेत हो तो शिकायेत पेटी मे लिख कर डाल दे लेकिन प्रजा फिर भी चुप !

राजा रोज़ शिकायत पेटी खोल कर देखता की शायद किसी ने कोई विरोध किया हो लेकिन उसे हमेशा पेटी खाली मिलती ! कुछ दिनो के बाद अचानक एक एक चिट्ठी मिली ... राजा खुश हुआ के चलो कम से कम एक आदमी तो जागा ,,,,, जब चिट्ठी खोली गयी तो उसमे लिखा था - "हुजूर जूते मारने वालों की संख्या बढ़ा दी जाए ... हम लोगो को काम पर जाने मे देरी होती है !
Yahi india me ho raha hai!

Monday, July 29, 2013

भगवान् को नारियल क्यों अर्पित करते हैं।

भगवान को नारियल क्यों अर्पित किया जाता है?
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आप देखेंगे की मन्दिर में आम तौर पर नारियल अर्पित
किया जाता है. शादी, त्यौहार, गृहप्रवेश, नई गाड़ी के उपलक्ष में
या किसी प्रकार के अन्य उत्सव या शुभ कार्य में भी प्रभु
को नारियल अर्पित किया जाता है.
प्रभु को नारियल अर्पित के पीछे जो मुख्य कारण है, आइये
उनका अवलोकन करे.
नारियल अर्पित करने से पहले उसके सिर के अलावा सारे तंतु
या रेशे उतार लिए जाते है. ऐसे में अब ये नारियल मानव
खोपडी के सामान दीखता है, और इसे फोड़ना इस बात का प्रतीक
है कि हम अपने अंहकार को तोड़ रहे है.
नारियल के अन्दर का पानी हमारी भीतर की वासनाये है,
जो हमारे अंहकार के फूटने पर बह जाती है.
नारियल निस्वार्थता का भी प्रतीक है. नारियल के पेड़ का तना,
पत्ती, फल (नारियल या श्रीफल) मानव को घर का छज्जा,
चटाई, तेल, साबुन आदि बनाने में काम में आता है.
नारियल का पेड़ समुद्र का खारा पानी लेकर मीठा, स्वादिष्ट और
पौष्टिक नारियल और नारियल का पानी देता है.

Thursday, July 25, 2013

सन 2031 में एक बंगलादेशी बनेगा आपके पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री।


वोट बैंक के लालची कुत्तो ने भारत के इस्लामीकरण की कसम खा ली है बंगाल में हिन्दुओ की हालत खराब है बांग्लादेशी मुस्लिम पापुलेशन बहा पर लाखो में कुछ वोट बैंक की बझा से आज TMC में 70 %मुस्लिम नेता है लगता है अब हिन्दुओ को बहा पर जमीर को जगाना अपने हक़ के लिए लड़ो हम आपके साथ है कुल मुस्लिम आबादी बंगाल में 20.240,536 .
पश्चिम बंगाल में वर्तमान विधानसभा चुनावों में बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों सरकार के गठन के बारे में फैसला करेंगे. मुस्लिम मतदाताओं भी चुनाव और अतीत में अपनी पसंद की सरकार बनाने की शक्ति के साथ निहित थे. W.Bengal में बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ हैरत की बात है अब केवल मुसलमान मतदाताओं जो राज करेंगे कि तय करेंगे कि राज्य में जनसांख्यिकीय संतुलन बदल गया है. इसके अलावा जम्मू एवं कश्मीर से, W.Bengal आबादी के अनुपात में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी वाले दूसरे राज्य है. W.Bengal की राजनीति हमेशा मुसलमानों के चारों ओर ध्यान केंद्रित किया है.
ममता खासकर बांग्लादेशी मुसलमानों की बड़े पैमाने पर घुसपैठ की वजह से जनसांख्यिकीय संतुलन काफी बदल गया है जहां क्षेत्रों में आकर्षक मुसलमानों में काफी आगे छोड़ दिया है. ममता और उसकी सेना इस तरह के मुस्लिम बहुल एक दर्जन जिलों में कार्रवाई में मजबूती है और खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों की सब्जियां, फल, मछली और समुद्री भोजन और स्थापना के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अपने चुनाव घोषणा पत्र में घोषित किया है. मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और वीरभूम की तरह चारों ओर 12 जिलों में रहने का मतलब है कि इन जिलों में सब्जियां, फल, मछली और समुद्री भोजन और मुसलमानों की आबादी 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच है. जनगणना 2001 के आंकड़ों के अनुसार, इन जिलों में मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि की दर बहुत ही खतरनाक है. 1991 से 2001 के दशक के दौरान मुस्लिम आबादी में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. सरकार के सूत्रों का कहना है और राजनीतिक दलों को मुस्लिम आबादी की इस वृद्धि प्राकृतिक नहीं है कि विश्वास करते हैं. बांग्लादेश से घुसपैठ के बिना मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि की दर में अनुपात संभव नहीं है.
इसके अलावा W.Bengal से, बांग्लादेश के साथ सीमा से सटे बिहार और असम के कुछ जिलों में भी उसी तरह से मुस्लिम आबादी में अजीब वृद्धि की सूचना दी है. W.Bengal में कम्युनिस्ट काडर सामूहिक और भारतीय नागरिकता में राशन कार्ड की खरीद करने में बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों की मदद की है. 10 प्रतिशत मुस्लिम आबादी की वृद्धि की जनगणना 2011 में अनुमान है, W.Bengal में जाहिर है अब मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत है. सरकारी अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है और इस तरह ममता के बीच निर्णायक संघर्ष करता है और मुस्लिम वोटों का यह बड़ा हिस्सा हड़पने के लिए छोड़ दिया. ऐसा लगता है कि ममता का साथ दिया पूरे मुस्लिम आबादी ग्राम नंदी में भूमि आंदोलन के दौरान देखा गया था. इसी प्रकार उत्तर 24 परगना और नादिया जिलों में, Satua समुदाय भी ममता को समर्थन दिया. satua समुदाय 1971 में भारत के लिए चले गए और इसकी जनसंख्या लगभग 60 लाख है.
बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों का satua समुदाय बहुत तेजी से बढ़ रही है. रिक्शा खींचने, हॉकरों और मजदूरों के रूप में काम कर रहे बांग्लादेशी मुसलमान घुसपैठियों की संख्या में वृद्धि हुई है और उनके रहने की स्थिति में भी सुधार हुआ है. गैर मुसलमानों को 0.7 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई है जबकि 1991 to2001 से कोलकाता में मुस्लिम आबादी है, लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई. कोलकाता में उस समय 20 प्रतिशत मुसलमान नहीं थी, लेकिन अब धीरे - धीरे बांग्लादेशी मुसलमानों बांग्लादेश के गांवों की सीमा से कोलकाता के लिए चले गए और बड़ी संख्या में हैं. W.Bengal सरकार के एक हाल ही में सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने 2011 की जनगणना के अनुसार, कोलकाता के मुस्लिम आबादी कम से कम 35 प्रतिशत नहीं है कि एक बहुत ही आश्चर्यजनक खुलासा किया गया है.
हिन्दू बंगालियों सबसे बुद्धिजीवी माना जाता है, लेकिन वे 34 साल के लिए वाम दलों का समर्थन किया है और अभी भी छोड़ दिया, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस की तरह राष्ट्र विरोधी राजनीतिक दलों का समर्थन किया है जिस तरह से, उनका रवैया समझ में आता नहीं है. यह W.Bengal का भविष्य बहुत निराशाजनक है लगता है, और यह उन लोगों के साथ बांग्लादेश में हुआ है के रूप में मुख्य रूप से बंगाली हिंदुओं को अपने ही देश में नरसंहार का सामना करना पड़ेगा. हम भविष्यवाणी की है के रूप में 2031 से अनुमान के रूप में एक बार,, मुसलमानों की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक, बंगाली हिंदुओं के बाहर प्रवाह W.Bengal में कोलकाता और अन्य मुस्लिम बहुल जिलों से शुरू होगा और राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में बांग्लादेशी मूल के मुसलमान का चयन करेंगे.