Monday, August 27, 2012

भाई राजीव दीक्षित जी की ऐसी आवाज जो आपके दिल को छू लेगी...


मेरी आवाज जहाँ तक जाए, सभी लोगों को प्रणाम है 
सोये  लोगों को जगाना, मेरा नया काम है 

MBA किया हो चाहे , कंप्यूटर का ज्ञाता हो , 
पढने में बिताया जीवन , ऐसी माता, भ्राता हो 

दावा करते हैं जो की , खुद को बड़ा ज्ञान है 
राजीव दिक्सित को सुना नहीं, तो कोरा अभिमान है 

अर्थव्यवस्था , संस्कृति , इतिहास और विज्ञानं को 
इस CD से जान पाओगे असली हिंदुस्तान को 

बिना दवा और डाक्टरों के, रोगों का निदान है 
अलग अलग विषयों पर ऐसे,  चोबीस व्याख्यान है 

काम की है बातें , सभी जाने , ऐसी कामना 
स्लेबस की किताबों में ,  नहीं होगा इनसे सामना 

सांस बराबर लेते रहना , ना सुनकर साँसे थामना 
ले लो एक एक CD , फिर ना जाने कब हो सामना 

पचास  घंटे की  CD में, मजेदार ज्ञान है 
MP3  फॉर्मेट है ,  हिंदी आसान है 

20  रूपये की चाय कोफ़ी पीके भूल जाते हैं 
बिसलेरी का पी के पानी , टॉयलेट में बहाते हैं 

धंधा नहीं , केवल देश प्रेम का अहसास  है 
एक रुपया भी कमाऊं , नहीं ऐसी कोई आस है 

CD प्लयेर में चलाना , चाहे अपनी कार में 
मोबाइल में कॉपी करना , पुरे परिवार में 

ज्ञान बांटने से है बढता, ये CD सब तक पहुंचानी है 
अपना देश अंधेरे में है , ज्योत से ज्योत जलानी है   
अपना देश अंधेरे में है , ज्योत से ज्योत जलानी है   
अपना देश अंधेरे में है , ज्योत से ज्योत जलानी है   

CD  की ज्याद जानकारी के लिए एक बार जरुर देखें  http://www.socialservicefromhome.com/p/mp3.html


गुजरात दंगो के बहाने मोदी जी को बदनाम करने कि कोशिश

देश गृहयुद्ध के तरफ पूरी तरह से बढ़ता जा रहा है और इसके आसार साफ़ तौर पर देखे जा सकते हैं| पर इससे मीडिया को क्या उसको तो उसकी दलाली की कीमत मिल रही है न भाई| कोई मीडिया का रहनुमा आसाम दंगे की तुलना गुजरात दंगे से कर रहा है और बताना चाह रहा है की भाई गुजरात में तो १००० लोग मारे गए तो आसाम में भी उतना हो जाने दो| पर आज तक मैंने ये नहीं देखा की मीडिया ने ये दिखाने की कोशिस की हो की गुजरात दंगे को ३ दिन के अन्दर ख़तम कर दिया गया तथा गुजरात में बीते १० सालों में कोई दंगा नहीं हुआ पर वहीँ जम्मू और कश्मीर तथा आसाम के साथ-साथ देश के अनगिनत हिस्सों में ज़माने से दंगे चलते चले आ रहे हैं और रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं|

Sunday, August 26, 2012

जियो मेरे लाल......

देख के अपनी दुर्गति भैया,

अन्‍ना खा गया ताव.

वो फिर भागा राजनीति को,

मिल्‍यो न जब कोई भाव.

पर केजरी तो अति अधीर हो,

भयो मुंगेरीलाल

जियो मेरे लाल, जियो रे मोरे लाल…

अनशन कितना भारी काम है,

केजरी ने लियो जान.

सोचा फिर से बैठ गया जो,

निकल न जाए प्राण.

खल बन खेलूं राजनीति मैं,

बांका न हो बाल

जियो मेरे लाल, जियो रे मोरे लाल…

रोज रोज इक नाटक लेकर,

जंतर मंतर आयेंगे.

ढ़ोंग करेंगे खूब स्‍वार्थ को

सत्‍ता तब पायेंगे

वैसे सारे जन ये निठल्‍ले,

खूब बजावें गाल

जियो मेरे लाल, जियो रे मोरे लाल…

साभार - मनोज कुमार श्रीवास्तव