Sunday, December 12, 2021

बच्चे भी रोए-बड़े भी रोए और किसान दिल से रोए


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तंबू समेटते समय मंजर अजीब था जनाब। किसानों के घर लौटते ही गरीब बच्चों को भोजन और आवास की चिंता सताने लगी है। लंगर में आज यह उनका अंतिम भोजन था।
...दिल्ली-हरियाणा के सिंघू सीमा पर हजारों किसानों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया और लंगर बंद कर दिए हैं। 13 वर्षीय आर्यन को अब अपने दो जून की रोटी की चिंता सता रही है। आर्यन कोई अकेला नहीं, बल्कि उसकी तरह सैकड़ों लोग हैं, जो किसानों की सामुदायिक रसोई में भोजन करते थे और एक साल से अधिक के विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों के तंबुओं में ही सो जाते थे।
...शनिवार को झुग्गी वासियों सहित बड़ी संख्या में बच्चों और आसपास के गरीबों ने किसानों के लंगर पर आखिरी बार पेटभर भोजन किया। बच्चों ने बताया कि हम नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना यहीं लंगर में करते थे। आज लंगर में यह हमारा आखिरी भोजन है। अब हमें भूख मिटाने को बहुत संघर्ष करना होगा। किसानों ने कहा कि उनके मन में भी इन बच्चों के लिए भावनाएं पैदा हो गई थीं। ये बच्चे विरोध स्थल पर आते थे और उन्हें अपने बेट-बेटियों और पोते की याद दिलाते थे।
...मोहाली के सतवंत सिंह ने कहा, ये बच्चे हमारे प्रदर्शन का हिस्सा बन गए थे। वे यहां भोजन के लिए आते थे। उन्होंने मुझे मेरे पोतों की याद दिला दी थी। मुझे उन्हें यहां अपने साथ रखना अच्छा लगता था। अब ईश्वर उनकी रक्षा करेंगे। हम ऐसे बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं।
...मलिन बस्तियों के निवासी आमतौर पर इस क्षेत्र में कारखानों या गोदामों में काम करते हैं। यह बेघर लोग किसानों के अस्थायी टेंटों में ही रहते थे। अब उन्हें किसी छत को लेकर चिंता सता रही थी। बिहार के सुपौल के 38 वर्षीय मोनू कुशवाहा ने कहा कि किसानों के विरोध-प्रदर्शन के लिए सिंघू सीमा पर आने से पहले, वह फुटपाथ पर सोता था। पिछले साल आंदोलन शुरू होने के बाद हालात बदल गये थे। कुशवाहा ने अफसोस जताते हुए कहा, किसानों के आंदोलन के दौरान मैं उनके एक तंबू में सोता था और लंगर में खाना खाता था। अब यह सब बंद हो जाएगा और मैं फिर से फुटपाथ पर आ जाऊंगा, मेरे जैसे सैकड़ों लोग ठंड-गर्मी में भटकते रहेंगे।
...कुंडली में केएफसी टॉवर के पास स्थित झुग्गियों में रहने वाले आठ वर्षीय मौसम ने कहा कि वह पिछले एक साल से लंगर में अच्छा खाना खा रही थी। उसने कहा, मेरे पिता एक कारखाने में काम करते हैं लेकिन परिवार बड़ा है, इसलिए हमें अक्सर एक समय का भोजन छोडऩा पड़ता है। पिछले एक साल से हम लंगर में बहुत सारा खाना खाते थे। हम घर के लिए भी खाना ले जाते थे। अब यह सब बंद हो जाएगा। हमारी बस्ती में जब कोई बीमार हो जाता था तो हम मरीज को लेकर यहीं आ जाते थे। यहां डाक्टर दवा देते थे और हम लोग सही हो जाते थे।
...11 वर्षीय तरुण ने कहा, मेरा स्कूल राजमार्ग के दूसरी ओर है। जब से किसान यहां आए, मुझे सडक़ पार करने में कोई समस्या नहीं होती थी। मैं यहां खाना खाता था और फिर स्कूल चला जाता था। मुझे कोई न कोई सडक़ पार करा देता था। यह मेरे लिए दुख की बात है कि किसान वापस जा रहे हैं। तरुण के पिता एक शोरूम में काम करते हैं।
...आज सुबह से ही झुग्गी-झोपड़ी वालों का झुंड किसानों के तंबुओं पर उमड़ पड़ा। उन्होंने तिरपाल, बांस की लकडिय़ां, लोहे की छड़ें एकत्र की। जिनके पास सामान रखने की जगह नहीं थी तो किसानों ने उनको कुछ रुपए दिए, किसी को कपड़े, किसी को बिस्तर दिया। 

..गरीबों ने बड़े दिल के किसानों को भरे मन से घर को विदा किया.. सब ने कहा- ये देश बने किसानों का और मजलूमों का..
साभार--सोशल मीडिया

Tuesday, January 26, 2021

किसकी ये जनवरी और किसका ये अगस्त है!

किसकी है जनवरी,
किसका अगस्त है?
कौन यहाँ सुखी है, कौन यहाँ मस्त है?

सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है
गालियाँ भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है
चोर है, डाकू है, झुठा-मक्कार है
कातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार है
जैसे भी टिकट मिला
जहाँ भी टिकट मिला

शासन के घोड़े पर वह भी सवार है
उसी की जनवरी छब्बीस
उसी का पन्द्रह अगस्त है
बाक़ी सब दुखी है, बाक़ी सब पस्त है…..

कौन है खिला-खिला, बुझा-बुझा कौन है
कौन है बुलन्द आज, कौन आज मस्त है?
खिला-खिला सेठ है, श्रमिक है बुझा-बुझा
मालिक बुलन्द है, कुली-मजूर पस्त है
सेठ यहाँ सुखी है, सेठ यहाँ मस्त है
उसकी है जनवरी, उसी का अगस्त है

पटना है, दिल्ली है, वहीं सब जुगाड़ है
मेला है, ठेला है, भारी भीड़-भाड़ है
फ्र‍िज है, सोफ़ा है, बिजली का झाड़ है
फै़शन की ओट है, सब कुछ उघाड़ है
पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है
गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो
मास्टर की छाती में कै ठो हाड़ है!
गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो
मज़दूर की छाती में कै ठो हाड़ है!
गिन लो जी, गिन लो जी, गिन लो
बच्चे की छाती में कै ठो हाड़ है!
देख लो जी, देख लो जी, देख लो
पब्लिक की पीठ पर बजट पर पहाड़ है!

मेला है, ठेला है, भारी भीड़-भाड़ है
पटना है, दिल्ली है, वहीं सब जुगाड़ है
फ़्रि‍ज है, सोफ़ा है, बिजली का झाड़ है
महल आबाद है, झोपड़ी उजाड़ है
ग़रीबों की बस्ती में

उखाड़ है, पछाड़ है
धत तेरी, धत तेरी, कुच्छो नहीं! कुच्‍छो नहीं
ताड़ का तिल है, तिल का ताड़ है
ताड़ के पत्ते हैं, पत्तों के पंखे हैं

पंखों की ओट है, पंखों की आड़ है
कुच्छो नहीं, कुच्छो नहीं…..
ताड़ का तिल है, तिल का ताड़ है
पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है

किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है!
कौन यहाँ सुखी है, कौन यहाँ मस्त है!
सेठ ही सुखी है, सेठ ही मस्त है
मन्त्री ही सुखी है, मन्त्री ही मस्त है
उसी की है जनवरी, उसी का अगस्त है!
- नागार्जुन

Friday, January 22, 2021

Religious Exemption from all types of forced/compulsory vaccine and establishment of vaccine court in our state.

To, ...........................................
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 .......................................
  Subject: Religious Exemption from all types of forced/compulsory vaccine and
 establishment of vaccine court in our state.
  Respected sir,
  With due to respect, l would like to inform you that
 I ...........................................................................................................................
 ...................................................... want Religious Exemption from all types of
 vaccine because our religion does not permit some objectionable ingredient such as
 (Fetal Bovine Serum, Pork,Cow Gelatin, Vero Cell, MRC-5 Cell, Alcohol,Aborted baby
 parts, Aluminum ) in vaccine to be injected to our body. I belong to ......................
 religion.Our religion does not permit to inject Cow,pig fetus bovine serum ,aborted baby
 parts in my Body.
 Request you to establish vaccine court in our district and state for vaccine related case filing in case of side effect of any vaccine. If in future any side effect of vaccine, public
 could easily file case/FIR/suit against vaccine company.
  The following indicates as the support of my appeal:
  1 The Supreme Court's verdict regarding HPV: Case No- 558/2012.
  2 Department related Parliamentary Standing Committee on Health and Family Welfare
 Report.
  3 The ongoing Public Interest litigation in Aurangabad Bench of Bombay High Court
 Court: Case No- 15232/2019.
  4. Under article 21 , 25-28 of the Indian constitution and international Nuremburg code .
  5 In USA there is a provision of religious exemption regarding vaccination.FBS related
 proof in www.biswaroop.com/fbs and PIL related matter is in court website Case number
  given.
  6 Dr Stanley plotking statement in supreme court america of ingredient of vaccine. link-
 http://youtube.com/watch?v=ZS0cYAFs2ps
  7 Under international Nurumberg code act and article 21 of the constitution.
 Therefore I request you to grant my family and neighbor for religious
 exemption in compulsory/forced vaccination.
   Regards, ........................................
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