Saturday, September 15, 2012

देश को दूसरी बार गुलाम बनाने की साजिश


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विद्वान् पाठकों को FDI के बारे में अवश्य ही पता होगा फिर भी सामान्य पाठकों की जानकारी के लिए सरल शब्दों में मेने दिव्या श्रीवास्तव से ली है, अवश्य पड़े और जाने की क्या है सच्चाई --

FDI अर्थात किसी देश का अन्य देश में निवेश करना। यह निवेश किसी भी क्षेत्र में हो सकता है , लेकिन आजकल जो मुद्दा सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है , वह है FDI- Retail का। उदाहरण के लिए 'वालमार्ट' ।विदेशी कंपनी ५१ प्रतिशत की भागीदारी के साथ हमारे देश में 'वालमार्ट' आदि के द्वारा निवेश करना चाहती है, जिसकी अनुमति श्री सिंह ने दी है।

- > क्यों करना चाहती है निवेश ? विदेशी कंपनी को क्या लाभ होगा ?

#जाहिर सी बात है , पैसा कमाने के लिए।
#निस्वार्थ तो करेगी नहीं दान देने की प्रथा केवल भारत में है , विदेशों में नहीं।
#भारत का हित तो चाहेंगे नहीं, अपना हित देखकर ही निवेश कर रहे हैं।
#इससे इन्हें एक बड़ी मार्केट मिलेगी , इनका नाम , प्रचार और टर्न -ओवर बढ़ जाएगा।
#मालामाल पहले से थीं , अब और हो जायेंगी।
#सीधा लाभ निवेश करने वाले देश को होगा। उसकी आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।

- > FDI -Retail से भारत को क्या लाभ होगा ?
#एक अच्छी और निरंतर सप्लाई मिलेगी खाद्य और अन्य वस्तुओं की --#लेकिन यह आपूर्ति हम अपने स्वदेशी संसाधनों द्वारा बखूबी कर सकते हैं।
#अपने गोदामों में सड़ते अनाज का इस्तेमाल करके भी कर सकते हैं।
#एक लाभ है क्वालिटी और variety मिलेगी (क्या अपने देश में क्वालिटी नहीं है ? यदि नहीं है तो उस दिशा में प्रयास किये जाएँ)
#देश को एक अच्छा इन्फ्रा-स्ट्रक्चर मिलेगा-( क्या इस उपलब्धि के लिए #विदेशियों को घुसपैठ करने दी जाए ? यह काम करने में तो हमारा देश स्वयं ही सक्षम है । कब तक दया पर जीवित रहेंगे परजीवियों की तरह ?)

- > इस निवेश से संभावित नुक्सान--
# छोटे तथा घरेलू उद्योग समाप्त हो जायेंगे।
जैसे अमेरिका जैसे बड़े देशो में हुआ ....
# छोटे व्यापारी उजड़ जायेंगे।
# किसान बर्बाद हो जायेंगे। वे अपनी ही जमीं पर नौकर बन जायेंगे
# गरीबों की आजीविका छीन जायेगी।
# वालमार्ट अपना पाँव पसारेगा तो धीरे धीरे हमारी ज़मीनें भी महंगे
दामों में खरीद कर अपनी जडें मजबूत करेगा और रियल स्टेट के दाम बढेंगे।
# पूर्व में गुलामी भी इसी तरह विदेशी कंपनियों की घुसपैठ से ही मिली थी।
हज़ारों लोग बेरोजगार हो जायेंगे।
# दूसरा कोई विकल्प न होने के कारण ये आत्महत्या करने पर मजबूर हो जायेंगे।
# अपने देशवासियों के साथ घात करके विदेश को संपन्न करना कहाँ की अकलमंदी है?

इस तरह से तो हमारा देश तरक्की नहीं करेगा बल्कि हम अपने देश की गरीब जनता, छोटे मोटे व्यापारी , उधोगपति, किसानों आदि के पेट पर लात मारेंगे।
श्री सिंह तो देशवासियों के दर्द को समझ नहीं रहे , लेकिन हम और आप इस निवेश के खिलाफ एकजुट होकर इसका बहिष्कार कर सकते हैं। हमने स्वदेशी के इस्तेमाल द्वारा आजादी पायी थी और विदेशी सामानों का बहिष्कार किया था। आज एक बार फिर उसी जागरूकता की ज़रुरत है वरना देश पुनः इन विदेशियों के चंगुल में चला जाएगा।

बेरोजगारी से पीड़ित हो हज़ारों लोग भूखे मरेंगे , रोयेंगे और कलपेंगे, आत्महत्या करेंगे,
वहीँ हमारी आने वाली पीढियां हो सकता है गुलाम भारत में ही जन्म लें। अतः सचेत रहने की अति-आवश्यकता है।
ये विदेशी कम्पनियाँ हम पर राज करेंगी और हमें कई दशक पीछे धकेल देंगीं ।

FDI में किसका है फायदा ?

भारत की कोई कंपनी 1 करोड़ रुपए लेकर नेपाल
जाती हैं, वहाँ एक फैक्ट्री लगती है...!
नेपाल के 100 लोग उसमे काम करते हैं !!
एक साल बाद हमारी कंपनी नेपाल मे 11 करोड़
रूपये कमाती है और मान लो 11 करोड़ मे से वो 1
करोड़ रूपये के वेतन काम करने वालों को बाँट देती है.!
और मान लो 1 करोड़ रूपये का ही नेपाल
की सरकार tax दे देती है और बाकी बचे 9 करोड़
रूपये net profit भारत ले आती है !!
तो फाइदा नेपाल को हो रहा है या भारत को????
एक अनपढ़ आदमी भी समझ जाएगा कि फायदा सिर्फ भारत को हो रहा है..!
नेपाल का पैसा भारत जा रहा है!
लेकिन मनमोहन सिंह
कहता है walmart के आने से भारत
को फायदा होगा !

Tuesday, September 11, 2012

जेएनयू में गोमांस पार्टी की तैयारी


नई दिल्ली [एसके गुप्ता]। देश के प्रतिष्ठित संस्थान जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय [जेएनयू] में एक संगठन गोमांस पार्टी की तैयारी कर रहा है। इस संगठन को एक वामपंथी संगठन बढ़ावा दे रहा है। माहौल बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। विश्व हिंदू परिषद व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पार्टी आयोजित करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में भी इस तरह की एक पार्टी हुई थी। विरोध में एक छात्र को चाकू मार दिया गया। इसके बाद भड़की हिंसा में पांच छात्र बुरी तरह घायल हुए थे और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।

जेएनयू में 'द न्यू मटेरियलिस्ट' नामक एक संगठन गुपचुप तरीके से गोमांस पार्टी की तैयारी कर रहा है। छात्रसंघ चुनाव के दौरान उसने माहौल को गर्म करने के लिए शनिवार रात कई छात्र संगठनों की बैठक कर पार्टी आयोजन के लिए समिति का गठन किया है। पहले यह पार्टी 17 सितंबर को ईवीआर पेरियार के जन्म दिवस पर होनी थी, मगर अब यह छात्रसंघ चुनाव के चलते 28 सितंबर को शहीद भगत सिंह के जन्म दिवस पर होगी। इसे लेकर कैंपस में पर्चे बांटे जा रहे हैं, जिसमें जन्माष्टमी को रसिया का जन्मदिन और होली पर भांग पीने का हवाला देते हुए गोमांस पार्टी आयोजित कर खाने की स्वतंत्रता की मांग की गई है। वामपंथी छात्र संगठनों ने यह तय किया है कि गोमांस को सार्वजनिक तौर पर ना पका कर अपनी-अपनी रसोइयों में पकाएंगे। इसके बाद पार्टी में उसका सेवन किया जाएगा। दक्षिणी जिला की पुलिस उपायुक्त छाया शर्मा का कहना है कि पुलिस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है।

कावेरी छात्रावास में हुई बैठक पर जेएनयू सेंटर फॉर अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी कर रहे अनूप कहते हैं कि गोमांस कहां से आएगा और कैंपस में पार्टी कहां होगी, इसका निर्णय कमेटी के सदस्य मिलकर करेंगे। हमारा उद्देश्य भाजपा, आरएसएस सहित हिंदूवादी संगठनों की राजनीति पर प्रहार करना है। ऐसे संगठनों ने गाय को राजनीति का केंद्र बनाया हुआ है। अनूप का कहना है कि जेएनयू संसद के कानून द्वारा बना शैक्षणिक संस्थान है। इसलिए गोमांस पार्टी पर दिल्ली एनसीआर एक्ट-1994 को वह नहीं मानते। गोमांस पार्टी आयोजन को लेकर अभी तक हुई बैठकों में जेएनयू व डीयू के कई प्राध्यापक भी शिरकत कर चुके हैं।

जेएनयू के कुलपति प्रो. एसके सोपोरी ने कहा है कि छात्रों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। लेकिन ऐसा आयोजन किसी भी कीमत पर नहीं होने दिया जाएगा। दिल्ली में गोमांस प्रतिबंधित है। ऐसा करने पर छात्रों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं विश्व हिंदू परिषद दिल्ली के महामंत्री सत्येंद्र मोहन ने इस मुद्दे पर पार्टी मनाने वालों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि गोमांस पार्टी करने वाले को देश में नहीं रहने दिया जाएगा। गौ माता का मांस खाने वाले इस आयोजन से पहले अपने मांस की चिंता कर लें। अगर ऐसा हुआ तो उसके गंभीर नतीजे होंगे।

वहीं, जेएनयू छात्रा और एबीवीपी की प्रदेश उपाध्यक्ष गायत्री दीक्षित ने इस मसले पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि मैने कुलपति को शिकायत कर अपना विरोध जताया है। अगर जेएनयू में ऐसा हुआ तो यहां की शांति भंग हो जाएगी।
http://in.jagran.yahoo.com/news/national/general/JNU-students-group-wants-cow-meat-party-VHP-warn_5_1_9650503.html

संस्कृत सभी भाषाओँ कि जननी

दुनिया की जो विशिष्ठ भाषा  मानी जाती है जैसे डच, इटालियन, जेर्मन, स्पनिश, फ्रेन्च, रसियन, डेनिश, पोर्तुगिश इत्यादि सभी भाषाए संस्कृत से निकली है | जेर्मनी के लोग स्वीकार कर जुके है की जेर्मन भाषा संस्कृत की देन है और उन्होंने अपनी एयरलाइन का
नाम संस्कृत में लुप्तहंसा रखा है | आजकल जेर्मनी में विस्वबिद्यालय में संस्कृत की पड़ाइ पे सबसे जादा पैसे खर्च किया जा रहा है | जेर्मनी दुनिया का पहला देश है जो अपने एक विस्यबिद्यालय संस्कृत की पड़ी के लिए समर्पित कर दिए जहाँ पर एक बिभाग सिर्फ चरक संहिता के लिए समर्पित है |
कोमुटर को चलने के लिए जो सबसे अछि भाषा का उपियोग हो सकता है वो है संस्कृत और दुनिया में सबसे अछि अल्गोरिदम संस्कृत में ही बनी है |
संस्कृत की एक विशेषता है की इसका व्याकरण एकदम पक्का है जो लाखो साल से एक ही है | इसीलिए जेर्मन और फ्रेन्च भाषा संस्कृत को आधार मानते है | संस्कृत में शब्दरूप और धातुरूप होते है ऐसे दुनिया के ५६ भाषा में है |
संस्कृत भाषा में शब्दों का सबसे बड़ा भंडार है दुनिया के सबसे जादा बोली जाने वाली भाषाओँ में से भी जादा शब्द भंडार संस्कृत में है | संस्कृत भाषा में अब तक जितने शब्दों का उपियोग हो जुका है उसकी शंख्या है १०२ अरब ७८ करोर ५० लाख | संस्कृत पंडित यों के अनुसार संस्कृत में अनन्त शब्द भंडार है | सबसे बड़ी बात सबसे कम शब्दों में सिर्फ संस्कृत भाषा में ही कहा जा सकता है | http://youtu.be/1oQ2LMp17qs

Sunday, September 9, 2012

महंगाई का ये दानव

चहकते हुए पड़ोस में
मातम सा छा गया है
महंगाई का ये दानव
एक दम से आ गया है!
मांगी थी फीस उसने
चांटा दिया पिता ने,
स्कूल आज बच्चा
रोता हुआ गया है!
वो भूख से तड़पकर
मजदूर मर रहा है,
सारे जहाँ की रोटी
ये कमबख्त खा गया है!
इस बार मेरी बहना
राखी न भेजना तू ,
ससुराल में बहन को
ये ख़त रुला गया है !!
/अज्ञात

भारत में दुग्ध क्रांति के जनक: डॉ. वर्गीज कुरियन

भारत में दुग्ध क्रांति के जनक माने जाने वाले डॉ. वर्गीज कुरियन का शनिवार देर रात 1.15 बजे निधन हो गया।

...आज दोपहर बाद 4 बजे आणंद में कुरियन का अंतिम संस्कार किया जाएगा। गुर्दे की बीमारी से लड़ रहे डॉक्टर कुरियन ने नाडियाड किडनी अस्पताल में अंतिम सांसें लीं।

26 नवंबर 1921 को केरल में जन्मे कुरियन को गुजरात के आणंद शहर में सहकारी डेरी विकास के एक सफल मॉडल की स्थापना करने और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने

के लिए जाना जाता है।

वर्ष 1973 में उन्होंने गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ़) की स्थापना की और 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे। जीसीएमएमएफ़ ही वह संस्था है जिसने अमूल ब्रैंड से

डेयरी उत्पाद बनाती है। 11 हज़ार से अधिक गांव के 20 लाख से अधिक किसानों की सदस्यता वाली यह संस्था सहकारिता के क्षेत्र में दूध और अन्य उत्पादों के लिए एक इतिहास रच चुकी है।

कुरियन को भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया। वर्ष 1965 में उन्हें रेमन मैगसायसाय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। आणंद में इंस्ट्टीट्यूट ऑफ रूरल

मैनेजमेंट की स्थापना की जो देश में अपनी तरह का एकमात्र संस्थान है।

डॉ. कुरियन के देहांत के तुरंत बाद अमूल डेयरी के एमडी राहुल कुमार अस्पताल पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। डॉ. कुरियन अपने पीछे पत्नी मौली और बेटी निर्मला को छोड़ गए।