Monday, April 17, 2017

🕉ढोल गंवार शुद्र पशु नारी, सकल तारणा के अधिकारी !!

🕉ढोल गंवार शुद्र पशु नारी,
सकल तारणा के अधिकारी !!
*(कृपया पढ़ें जरूर, इसका अर्थ क्या है ??)*

🏵 *१. ढोल (वाद्य यंत्र)*- ढोल को हमारे सनातन संस्कृति में उत्साह का प्रतीक माना गया है इसके थाप से हमें नयी ऊर्जा मिलती है. इससे जीवन स्फूर्तिमय, उत्साहमय हो जाता है. आज भी विभिन्न अवसरों पर ढोलक बजाया जाता है. इसे शुभ माना जाता है.

👳 *२. गंवार {गाँव के रहने वाले लोग )*- गाँव के लोग छल-प्रपंच से दूर अत्यंत ही सरल स्वभाव के होते हैं. गाँव के लोग अत्यधिक परिश्रमी होते है जो अपने परिश्रम से धरती माता की कोख अन्न इत्यादि पैदा कर संसार में सबका भूख मिटाते हैं. आदि-अनादि काल से ही अनेकों देवी-देवता और संत महर्षि गण गाँव में ही उत्पन्न होते रहे हैं. सरलता में ही ईश्वर का वास होता है.

💂 *३. शुद्र (जो अपने कर्म व सेवाभाव से इस लोक की दरिद्रता को दूर करे)*- सेवा व कर्म से ही हमारे जीवन व दूसरों के जीवन का भी उद्धार होता है और जो इस सेवा व कर्म भाव से लोक का कल्याण करे वही ईश्वर का प्रिय पात्र होता है. कर्म ही पूजा है.

🐄 *४. पशु  (जो एक निश्चित पाश में रहकर हमारे लिए उपयोगी हो)* - प्राचीन काल और आज भी हम अपने दैनिक जीवन में भी पशुओं से उपकृत होते रहे हैं. पहले तो वाहन और कृषि कार्य में भी पशुओं का उपयोग किया जाता था. आज भी हम दूध, दही. घी विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न इत्यादि के लिए हम पशुओं पर ही निर्भर हैं. पशुओं के बिना हमारे जीवन का कोई औचित्य ही नहीं. वर्षों पहले जिसके पास जितना पशु होता था उसे उतना ही समृद्ध माना जाता था. सनातन धर्म में पशुओं को प्रतीक मानकर पूजा जाता है.

👰 *५. नारी ( जगत -जननी, आदि-शक्ति, मातृ-शक्ति )*- नारी के बिना इस चराचर जगत की कल्पना ही मिथ्या है नारी का हमारे जीवन में माँ, बहन बेटी इत्यादि के रूप में बहुत बड़ा योगदान है. नारी के ममत्व से ही हम हम अपने जीवन को भली-भाँती सुगमता से व्यतीत कर पाते हैं. विशेष परिस्थिति में नारी पुरुष जैसा कठिन कार्य भी करने से पीछे नहीं हटती है.

👏; *जब जब हमारे ऊपर घोर विपत्तियाँ आती है तो नारी दुर्गा, काली, लक्ष्मीबाई बनकर हमारा कल्याण करती है. इसलिए सनातन संस्कृति में नारी को पुरुषों से अधिक महत्त्व प्राप्त है.*

✍ *सकल तारणा के अधिकारी*
इससे यह तात्पर्य है :-
*१. सकल=  सबका*
*२. तारणा= उद्धार करना*
*३. अधिकारी = अधिकार रखना*
उपरोक्त सभी के द्वारा हमारे जीवन का उद्धार होता है इसलिए इसे उद्धार करने का अधिकारी कहा गया है.

😜अब यदि कोई व्यक्ति या समुदाय विधर्मियों या पाखंडियों के कहने पर अपने ही सनातन को माध्यम बनाकर. उसे गलत बताकर अपना स्वार्थ सिद्ध करता है तो ऐसे विकृत मानसिकता वालों को भगवान् सद्बुद्धि दे, तथा सनातन पर चलने की प्ररेणा दे।

😳 *ज्ञात रहे सनातन धर्म सबके लिए कल्याणकारी था कल्याणकारी है और सदा कल्याणकारी ही रहेगा. सनातन सरल है इसे सरलता से समझे कुतर्क पर न चले. अपने पूर्वजों पर सदेह करना महापाप है.*

📙इसलिए जो भी रामचरितमानस सुन्दरकाण्ड के चौपाई का अर्थ गलत समझाए तो उसे इसका अर्थ जरूर समझाए और अपने धर्म की रक्षा करे.........
*सर्वे भवन्तु सुखिनः*
*सर्वे संतु निरामया:*
*सर्वे भद्राणि पश्यन्तु*
*माँ कश्चित् दुःख भाग भवेत्*

⛳यह इसका तात्विक अर्थ है...

हे ईश सब सुखी हों
कोई नाहो दुःखहारी
सब हों निरोगी भगवन्
धन धान्य के भंडारी

सब भद्र (अच्छा) भाव देखें
सन्मार्ग के पथिक हों
दुखिया ना कोई होवे
सृष्टि में प्राण(जीवन)धारी !!

Sunday, February 19, 2017

उर्दू शब्दों को त्याग कर हिन्दी के शब्द अपनाएँ

कृपया उर्दू शब्दों को त्यागकर संस्कृत और हिंदी शब्दों का प्रयोग करे...

ये हैं वो उर्दू के शब्द जो आप प्रतिदिन प्रयोग करते हैं, इन शब्दों को त्याग कर मातृभाषा का प्रयोग करें:-
ईमानदार – निष्ठावान
इंतजार – प्रतीक्षा
इत्तेफाक – संयोग
सिर्फ – केवल
शहीद – बलिदान
यकीन – विश्वास, भरोसा
इस्तकबाल – स्वागत
इस्तेमाल – उपयोग, प्रयोग
किताब – पुस्तक
मुल्क – देश
कर्ज – ऋण
तारीफ – प्रशंसा
इल्ज़ाम – आरोप
गुनाह – अपराध
शुक्रिया – धन्यवाद
सलाम – नमस्कार
मशहूर – प्रसिद्ध
अगर – यदि
ऐतराज – आपत्ति
सियासत – राजनीति
इंतकाम – प्रतिशोध
इज्जत – सम्मान
इलाका – क्षेत्र
एहसान – आभार, उपकार
अहसानफरामोश – कृतघ्न
मसला – समस्या
इश्तेहार – विज्ञापन
इम्तेहान – परीक्षा
कुबूल – स्वीकार
मजबूर – विवश, लाचार
मंजूरी – स्वीकृति
इंतकाल – मृत्यु
बेइज्जती – तिरस्कार
दस्तखत – हस्ताक्षर
हैरान – आश्चर्य
कोशिश – प्रयास, चेष्टा
किस्मत – भाग्य
फैसला – निर्णय
हक – अधिकार
मुमकिन – संभव
फर्ज – कर्तव्य
उम्र – आयु
साल – वर्ष
शर्म – लज्जा
सवाल – प्रश्न
जबाब – उत्तर
जिम्मेदार – उत्तरदायी
फतह – विजय
धोखा – छल
काबिल – योग्य
करीब – समीप, निकट
जिंदगी – जीवन
हकीकत – सत्य
झूठ – मिथ्या
जल्दी – शीघ्र
इनाम – पुरस्कार
तोहफा – उपहार
इलाज – उपचार
हुक्म – आदेश
शक – संदेह
ख्वाब – स्वप्न
तब्दील – परिवर्तित
कसूर – दोष
बेकसूर – निर्दोष
कामयाब – सफल
गुलाम – दास

और भी अन्य सैंकड़ों उर्दू के शब्द जो हम प्रयोग
में लेते हैं। जांच करें कि आप कितने उर्दू के शब्द बोलते है।

हिन्दी बोलने व लिखने का प्रयास करे धन्यवाद ।
🚩🚩🚩🚩🚩

Friday, February 10, 2017

अंग्रेजी भाषा की दरिद्रता

"अंग्रेजी" भाषा का सच यह है

अँग्रेज़ी भाषा एक दम रद्दी है, इस भाषा का जब मैने इतिहास पढ़ा तो पता चला की पाँचवी शताब्दी में तो ये भाषा आई इसका मतलब है कि मुश्किल से 1500 साल पुरानी है l

हमारी भाषा तो करोड़ों वर्ष पुरानी है संस्कृत, हिन्दी, मराठी, कन्नड़, मलयालम। अंग्रेजी दुनिया की सबसे रद्दी भाषा है, इसकी कोई अपनी व्याकरण नहीं  है जो सूद्ढ़ हो और अपनी हो।

आपको एक उदाहरण देता हूँ. अँग्रेज़ी में एक शब्द है “PUT” इसका उच्चारण होता है पुट दूसरा शब्द है “BUT” इसका उच्चारण है बट इसी तरह “CUT ” को कट बोला जाता है जबकि तीनों शब्द एक समान हैं. इसकी बजह है भाषा के व्याकरण का ना होना. इसी तरह कभी “CH” का उच्चारण “का” होता है तो कभी “च”  कोई नियम नहीं है l इस भाषा की कितनी बड़ी कमज़ोरी है।

अँग्रेज़ी में एक शब्द होता है “SUN” जिसका मतलब होता है सूरज l मै सारे काले अँग्रेज़ों को चुनौती देता हूँ कि सूरज का दूसरा शब्द अँग्रेज़ी में से ढूँढ कर दिखाए यानी की “SUN” का पर्यायवाची; पूरी अँग्रेज़ी में दूसरा शब्द नही है जो सूरज को बता सके l अब हम संस्कृत की बात करें  “सूर्य” एक शब्द  है इसके अलावा दिनकर , दिवाकर, भास्कर 84 शब्द हैं संकृत में।

अंग्रेजी का एक शब्द हैं “MOON” इसके अलावा कोई शब्द नहीं  है; संस्कृत में 56 शब्द है चाँद के लिये l इसी तरह पानी के लिए भी जहाँ अँग्रेज़ी में एक शब्द  है “WATER” चाहे वो नदी का हो, नाले का या कुए का. संस्कृत में हर पानी के लिए अलग- अलग शब्द है, सागर के पानी से लेकर कीचड़ के पानी तक सभी के लिए अलग- अलग शब्द है।
अंग्रेजी कितनी ग़रीब भाषा है, शब्द ही नही है. चाचा भी “अंकल” मौसा भी “अंकल” फूफा भी “अंकल” और फूफा का फूफा भी “अंकल” और मौसा का मौसा भी “अंकल” कोई शब्द ही नहीँ है अंकल के अलावा इसी तरह चाची, मामी, मौसी सभी के लिए “आंटी”
कोई शब्द ही नहीँ है इसके अलावा।

हम तो मूर्ख हैं जो इस अँग्रेज़ी के चक्कर में फस गये। अकल नहीं है, अकल उन्ही की मारी गयी है जो अँग्रेज़ी सीख गये हैं l जिन्होने नहीं  सीखी वो बहुत होशियार है l कभी- कभी में अँग्रेज़ी पढ़ें लिखे घरों में भी जाता हूँ l वे अँग्रेज़ी की बजह से मुझे कैसे मूर्ख दिखाई देते हैं उसका उदाहरण देता हूँ l वो ना तो अंग्रेज हैं और ना हिन्दुस्तानी है बीच की खिचड़ी हैं l वो खिचड़ी कैसी हैं; एक परिवार में गया, पिताजी का नाम रामदयाल, माताजी का नाम गायत्री देवी, बेटे का नाम “टिन्कू”। रामदयाल और गायत्री देवी का ये टिन्कू कहा से आ गया l जब में उन से पूछता हूँ कि आपको टिंकू का मतलब पता है तो उनको नहीं पता होता है l

ऐसे मूर्ख लोग है अर्थ मालूम नही नाम रख लिया टिंकू l फिर में उनको अँग्रेज़ी शब्द कोष दिखता हूँ, अँग्रेज़ी की सबसे पुराना शब्द कोष है वेबस्टेर;  जिसमें टिन्कू का अर्थ है “आवारा लड़का”l जो लड़का माँ बाप की ना सुने वो टिंकू और हम पढ़े लिखे मूर्ख लोग क्या कर रहें है, अच्छे ख़ासे आज्ञाकारी पुत्र को आवारा बनाने में लगे हैं इस अग्रेज़ी के चक्कर में।
अंगेजी पढ़े लिखे घरों में डिंपल, बबली, डब्ली, पपपी, बबलू, डब्लू जैसे बेतुके और अर्थहीन नाम ही मिलते हैं l भारत में नामों की कमी हो गई है क्या?

कभी कभी में इससे भी बड़ी मूर्खताएँ मैं देखता हूँ l कभी किसी अधकचरे हिन्दुस्तानी के घर में जाऊं तो रोब झाड़ने के लिए अँग्रेज़ी बोलते हैं चाहे ग़लत ही क्यों ना हो l वह चाहे तो हिन्दी में भी बोल सकता है लेकिन रोब झाड़ने के लिए अँग्रेज़ी मैं ही बोलेगा। वो बोलेगा “ओ श्रवण कुमार  she is my misses ” तो मैं पूछता हूँ ” really” ! she is your misses ?”

क्योंकि उसको “मिसेज़” का अर्थ नहीं  मालूम।“मिसेज” का अर्थ क्या है? किसी भी सभ्यता में जो शब्द निकलते उनका अपना सामाजिक इतिहास और अर्थ होता है । इंगलेंड की सभ्यता का सबसे ख़राब पहलू ये है जो आपको कभी पसंद नहीं आएगी कि वहाँ एक पुरुष और एक स्त्री जीवन भर साथ कभी नहीं रहते; बदलते रहते है कपड़ों की तरह. मेने कई  लेखों में  पडा है इंग्लेंड और यूरोप में है उनकी 40 -40 शादियाँ हो चुकी और और 41वी करने को तैयारी है ।एक पुरुष कई स्त्रियों से संबंध रखता है एक स्त्री कई पुरुषों से संबंध रखती है। तो पत्नी को छोड़ कर पुरुष जितनी भी स्त्रियों से संबंध रखता है वो सब “मिसेज़” कहलाती है। इसका मतलब हुआ कोई भी महिला जिसके साथ आप रात को सोएं। अब यहाँ धर्म पत्नी को मिसेज़ बनाने में लगे हैं; मूर्खों के मूर्ख।

“मिस्टर” का मतलब उल्टा, पति को छोड़ कर पुरुष जिसके साथ आप रात बिताएँ। छोड़िए इन अँग्रेज़ी शब्दों को इनमें कोई दम नही है ।एक तो सबसे खराब अँग्रेज़ी का शब्द है “मेडम” पता नहीं  है लोग बोलते कैसे है । आप जानते है यूरोप में मेडम कौन होती है ।ऐसी सभ्यता जहाँ परस्त्री गमन होगा वहां वेश्यावृति भी होगी ।परस्त्री गमन पर पुरुष गमन चरम पर होगा ।तो वैश्याएँ जो अपने कोठों को चल़ाती हैं अपनी वेश्यावृती के धंधे को चलाने के लिए ।वैश्या प्रमुख को वहां मैडम कहा जात है ।हमारे यहाँ ऐसे मूर्ख लोग हैं जो अपनी बहिनों को मैडम कहते है, अपनी पत्नि को मैडम कहते है ।और पत्नि को भी शर्म नहीं आती मैडम कलवाने में वो भी कहती हैं मैडम कहो मुझको । पहले जान तो लो इसका मतलब फिर कहलाओ।

अपने भारत में कितने सुंदर सुंदर शब्द हैं जैसे  “श्रीमती” श्री यानी लक्ष्मी मति यानी बिद्धि जिसमें लक्ष्मी और सरस्वती एक साथ निवास करें वो श्रीमती उसको हमने मिसेज़ बना दिया । इस देश का सत्यानाश किया अँग्रेज़ी पढ़े लिखे लोगों ने; पहले तो अँग्रेज़ी भाषा ने किया फिर इन्होने और ज़्यादा किया ।मेरा आपसे हाथ जोड़ के निवेदन है इस अँग्रेज़ी भाषा के चक्कर में मत पड़िये कुछ रखा नहीं है इसमें।

विश्व के सबसे ताकतवर देश  चीन और जापान...अमेरिका..इंग्लेंड..ये सिर्फ अपनी भाषा बोलते है..बिज़्नेस भी अपनी भाषा मे ही करते है
क्योंकि बहा का आम नागरिक समर्पित है ।पर हमारे यहाँ इस तरीके के लोग है जो इस तरह की बात सुनकर तुरंत अपने पिछवाडे मे आग लगाकर घूमने लगते है ।
मै सिर्फ यही कहूँगा इस तरह के लोगो को
जो अपनी हिन्दी को छोड़कर अँग्रेजी की प्रशंसा करते है वो लोग अपनी माँ को माँ बोलना भूलकर किसी  वैश्या को माँ बोलने मे गर्व महसूस करते हैl

मृत्युभोज

मृत्युभोज से ऊर्जा नष्ट होती है
महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि .....
मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
जिस परिवार में मृत्यु जैसी विपदा आई हो उसके साथ इस संकट की घड़ी में जरूर खडे़ हों
और तन, मन, धन से सहयोग करें
लेकिन......बारहवीं या तेरहवीं पर मृतक भोज का पुरजोर बहिष्कार करें।
महाभारत का युद्ध होने को था,
अतः श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जा कर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया ।
दुर्योधन द्वारा आग्रह ठुकराए जाने पर श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह चल पड़े,
तो दुर्योधन द्वारा श्री कृष्ण से भोजन करने के आग्रह पर कृष्ण ने कहा कि
>
’’सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः’’
अर्थात्
"जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो,
तभी भोजन करना चाहिए।
>
लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो, वेदना हो,
तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए।"
>
हिन्दू धर्म में मुख्य 16 संस्कार बनाए गए है,
जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान एवं अन्तिम तथा 16वाँ संस्कार अन्त्येष्टि है।
इस प्रकार जब सत्रहवाँ संस्कार बनाया ही नहीं गया
तो सत्रहवाँ संस्कार
'तेरहवीं का भोज'
कहाँ से आ टपका।
किसी भी धर्म ग्रन्थ में मृत्युभोज का विधान नहीं है।
बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
लेकिन हमारे समाज का तो ईश्वर ही मालिक है।
इसीलिए
महर्षि दयानन्द सरस्वती,
पं0 श्रीराम शर्मा,
स्वामी विवेकानन्द
जैसे महान मनीषियों ने मृत्युभोज का जोरदार ढंग से विरोध किया है।
जिस भोजन बनाने का कृत्य....
रो रोकर हो रहा हो....
जैसे लकड़ी फाड़ी जाती तो रोकर....
आटा गूँथा जाता तो रोकर....
एवं पूड़ी बनाई जाती है तो रो रोकर....
यानि हर कृत्य आँसुओं से भीगा हुआ।
ऐसे आँसुओं से भीगे निकृष्ट भोजन
अर्थात बारहवीं एवं तेरहवीं के भोज का पूर्ण रूपेण बहिष्कार कर समाज को एक सही दिशा दें।
जानवरों से भी सीखें,
जिसका साथी बिछुड़ जाने पर वह उस दिन चारा नहीं खाता है।
जबकि 84 लाख योनियों में श्रेष्ठ मानव,
जवान आदमी की मृत्यु पर
हलुवा पूड़ी पकवान खाकर शोक मनाने का ढ़ोंग रचता है।
इससे बढ़कर निन्दनीय कोई दूसरा कृत्य हो नहीं सकता।
यदि आप इस बात से
सहमत हों, तो
आप आज से संकल्प लें कि आप किसी के मृत्यु भोज को ग्रहण नहीं करेंगे और मृत्युभोज प्रथा को रोकने का हर संभव प्रयास करेंगे
हमारे इस प्रयास से यह कुप्रथा धीरे धीरे एक दिन अवश्य ही पूर्णत: बंद हो जायेगी

Wednesday, February 1, 2017

माँ सरस्वती के 12 नाम

*🙏🏻🌺सरस्वतीद्वादशनामस्तोत्रम्🌺🙏🏻*

_सरस्वती शुक्लवर्णासस्मितांसुमनोहराम।_
_कोटिचन्द्रप्रभामुष्टश्री युक्त विग्रहाम॥_

_वह्निशुद्धांशुकाधानांवीणा पुस्तक धारिणीम्।_
_रत्नसारेन्द्रनिर्माण नव भूषण भूषिताम॥_

_सुपूजितांसुरगणैब्रह्म विष्णु शिवादिभि:।_
_वन्दे भक्त्यावन्दितांचमुनीन्द्रमनुमानवै:॥_

*प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती।*
*तृतीयं शारदा देवी चतुर्थ हंस वाहिनी॥*

*पञ्चमजगतीख्याता षष्ठंवागीश्वरी तथा।*
*सप्तमेकुमुदीप्रोक्ता अष्टमेब्रह्मचारिणी॥*

*नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।*
*एकादशं चन्द्रकान्ति द्वादशं भुवनेश्वरी॥*

*द्वादशैतानि नामानी त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।*
*जिह्वाग्रेवसते नित्यं ब्रह्मरूपासरस्वती॥*

🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

सरस्वती स्त्रोतम्

*॥श्रीसरस्वत्यष्टोत्तर शतनामस्तोत्रम्॥*

_सरस्वती महाभद्रा महामाया वरप्रदा।_
_श्रीप्रदा पद्मनिलया पद्माक्षी पद्मवक्त्रगा॥१॥_

_शिवानुजा पुस्तकधृत् ज्ञानमुद्रा रमा परा।_
_कामरूपा महाविद्या महापातकनाशिनी॥२॥_

_महाश्रया मालिनी च महाभोगा महाभुजा।_
_महाभागा महोत्साहा दिव्याङ्गा सुरवन्दिता॥३॥_

_महाकाली महापाशा महाकारा महाङ्कुशा।_
_सीता च विमलाविश्वा विद्युन्माला च वैष्णवी॥४॥_

_चन्द्रिका चन्द्रवदना चन्द्रलेखाविभूषिता।_
_सावित्री सुरसा देवी दिव्यालङ्कारभूषिता॥५॥_

_वाग्देवी वसुधा तीव्रा महाभद्रा महाबला।_
_भोगदा भारती भामा गोविन्दा गोमती शिवा॥६॥_

_जटिलाविन्ध्यवासा च विन्ध्याचलविराजिता।_
_चण्डिका वैष्णवी ब्राह्मी ब्रह्मज्ञानैकसाधना॥७॥_

_सौदामिनी सुधामूर्तिस्सुभद्रा सुरपूजिता।_
_सुवासिनी सुनासा च विनिद्रा पद्मलोचना॥८॥_

_विद्यारूपा विशालाक्षी ब्रह्मजाया महाफला।_
_त्रयीमूर्ती त्रिकालज्ञा त्रिगुणा शास्त्ररूपिणी॥९॥_

_शुम्भासुरप्रमथिनी शुभदा च सर्वात्मिका।_
_रक्तबीजनिहन्त्री च चामुण्डाचाम्बिका तथा॥१०॥_

_मुण्डकाय प्रहरणा धूम्रलोचनमर्दना।_
_सर्वदेवस्तुता सौम्या सुरासुरनमस्कृता॥११॥_

_कालरात्री कलाधारा रूप सौभाग्यदायिनी।_
_वाग्देवी च वरारोहा वाराही वारिजासना॥१२॥_

_चित्राम्बरा चित्रगन्धा चित्रमाल्यविभूषिता।_
_कान्ता कामप्रदा वन्द्या विद्याधरा सूपूजिता॥१३॥_

_श्वेतासना नीलभुजा चतुर्वर्गफलप्रदा।_
_चतुराननसाम्राज्या रक्तमध्या निरञ्जना॥१४॥_

_हंसासना नीलजङ्घा ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका।_
_एवं सरस्वती देव्या नाम्नामष्टोत्तरशतम्॥१५॥_

                *इति*
*🌺श्रीसरस्वत्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्*🌺
              *सम्पूर्णम्॥*

Thursday, January 26, 2017

अंडे रोगकारक और विषयुक्त हैं

*अण्डे में डी. डी. टी. विष*
(Eggs Contain D.D.T.)
After eighteen month's research it has been established that 30./. of eggs contain D.D.T. (poison).
Agricultural Deptt, Florida, America, Health Bulletin–october 1967.

अठारह महीने के परीक्षण के पश्चात् यह ज्ञात हुआ कि अण्डों में ३० प्रतिशत डी.डी.टी. (विष) भरा है।

*अण्डों से दिल की बीमारी, हाईब्लड प्रेशर आदि*
(Eggs cause Heart Trouble, High Blood pressure etc.)
"Even if we had the best of eggs, we would be better off without them, as they are too high in cholesterol, one important cause of arteries, heart, brain and kindney diseases and gall–stones. Fruits and vegetables and vegetable oils have none or hardly any cholesterol.
―Dr. Catherine, Occano. California (U.S.A.)
(How Healthy are eggs-p. 7)

यदि बढ़िया अण्डे भी मिलें तो भी उनके बिना ही हम अधिक स्वस्थ रहेंगे क्योंकि उन अण्डों में कॉलेस्ट्रोल की मात्रा इतनी अधिक होती है कि जिसके कारण अण्डों से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, गुर्दो की बीमारी, पित्त की थैली में पथरी आदि रोग पैदा हो जाते हैं। फलों, सब्जियों और वनस्पति तेलों में कॉलेस्ट्रोल बिल्कुल नहीं होता।

*अण्डों से धमनियों में जख्म*
(Eggs cause Corrosion of Blood vessels)
Eggs are also harmful. You may say that "Eggs, and I get along well" but a chemical analysis proves differently. The yoke of the egg contains cholesterol a waxy alcohol. which deposits in the liver and blood vessels producing corrosion hardening of the arteries.
―Dr. J. Aman wlikins (England)
(How healthy are eggs-page. 6-7)

अण्डे हानिकारक हैं। तुम्हारा यह कहना कि अण्डों से मेरा स्वास्थय बनता है, गलत है―क्योंकि रासायनिक परिक्षण तुम्हारी धारणा के विरुद्ध फैसला देता है। वह कहता है कि अण्डे की जर्दी में कालेस्टरोल नामक भयानक तत्व पाया जाता है। जो कि एक चिकना अल्कोहल है। वह जिगर में जाकर जमा हो जाता है और रगों (धमनियों) में जख्म और कड़ापन पैदा करता है।

*अण्डे से पित्ताशय में पथरी*

*अण्डे से एग्जीमा और लकवा*
The egg-white is more harmful portion of the egg. Animals fed on fresh egg-white developed a severe skin inflamation and paralysis.
―Dr. Robert Gross (England)
(How Healthy are eggs P. 3-4)

अण्डे की सफेदी अण्डे का सबसे ज्यादा खतरनाक भाग है। जिन जानवरों को अण्डे की सफेदी खिलाई गई उनका चमडा सूज गया और उन्हें लकवा मार गया।
(यदि मनुष्य उसको खाते हैं तो उनकी इससे भी अधिक दुर्दशा हो सकती है)।

*अण्डे से टी.वी. और पेचिश*
(Eggs cause T.B. and white Diarrhoea)
Chicken diseases are very numerous. Eggs may carry tuberculosis from chickens. If an infected chick survives, it will mature and lay infectuous egg chickens. Leukaemia may be transmitted through the eggs. Hens, infected with white diarrhoea, will lay eggs containing the germs which usually consist in the collitic sympatom complexes in human beings.
―Dr. Robert Gross (England)
(How Healthy are eggs p. 1.)

मुर्गी के बच्चों में बहुत-सी बीमारियां होती हैं। अण्डे उन बीमारियों को विशेषतया टी.बी. पेचिश आदि के कीटाणुओं को अपने साथ लाते हैं। जो इन अण्डों को खाता है उनमें ये रोग फैल जाते हैं।

*अण्डे खाना बेरहमी के साथ डकैती*
(Egg-eating involves not only cruelty but it is also a robbery. The egg is unborn chick. Egg-eating is parental poultry robbery or chicken foeticide.
―(Dr. J. Amon Wilkins
(H. H. E. P. 6)

अण्डा अव्यक्त मुर्गी का बच्चा है। अण्डा एक प्रकार से गर्भ में डकैती डालने के समान है। यूं कहिए मुर्गी के बच्चे की हत्या के बराबर है। किसी जीव का बच्चा इस प्रकार डाका डाल कर या छीनकर उठा लेना कोई ईमानदारी या मनुष्यता नहीं। अण्डा खाने या इकट्ठा करने वाले, द्वारा उस गरीब, बेजबान मुर्गी के होने वाले बच्चे को, जिसका अभी उसने मुंह भी नहीं देखा हो उसको इस प्रकार हड़पना या चुराना कहां की सज्जनता और इन्सानियत है? उस बीचारी के दिल पर क्या गुजरती होगी? क्या वह अपने ही मन में कुढ़ती न होगी? उसकी आत्मा से अंडे उठाने य खाने वाले के लिए गालियां निकलती होंगी। उसकी आहें भी तो निकल कर अंडे खाने वालों का बुरा कर सकती हैं, जैसा कि हम अभी साधारण जीवन में देखते हैं।

*अण्डे घृणित तत्त्वों से पूर्ण*
(Eggs are full of filthy substances.)
The origin and growth of eggs is from filthy substance which man abhors Even to touch. Their eating involves cruelty and robbery. They are more harmful to human health than anything else. Man can recoup his health and make his palate tasteful by various vegetables, fruits and nuts.
―(Dr. Kamta prasad, Aliganj (Etah) India.
(H. H. E. P. 8)

अण्डे की उत्पत्ति और विकास उन पदार्थों के मेल से होता है जो कि बड़े गन्दे और घृणित माद्द से भरे हैं। इन पदार्थों को छूना भी मनुष्य के लिए घृणित है, खाने की बात तो बहुत दूर की है। मनुष्य के स्वास्थय को बिगाड़ने के लिए इनसे और अधिक क्या वस्तु हो सकती है? मनुष्य अपना सुन्दर स्वास्थय विभिन्न फलों, मेवों, शाकों से प्राप्त कर सकता है और इन्हीं से जीभ के स्वाद की पूर्ति भी भली-भांति हो सकती है।

*अण्डों से पेट में सड़ान और बदबू*
(Eggs cause putrefaction and bad smell in stomach)
Eggs are deficient in calcium and do not contain carbohydrates. So their tendency is to favour putrefac-tive decomposition in the intestines rather than to encourage fermantative organism to develop.
―(Dr. E. V. Mc. Callum―Agreat Medical Authority, Newer knowledge of Nutrition P.17
(H. H. P. 6)

अण्डों में कैल्शियम की कमी और कार्बोहाईड्रेटस का अभाव होता है। इस कारण ये बड़ी आतों में जाकर सड़ान्द और बदबू पैदा करते हैं।

*अण्डे के सम्बन्ध में उपरोक्त सन्दर्भ और टिप्पणियों से यह सिद्ध होता है कि वास्तव में अण्डे में अनेक प्रकार के विष भरे पड़े हैं जो मनुष्य के स्वास्थय को हानि ही नहीं पहुँचाते बल्कि धीरे-धीरे शरीर में अनेक रोगों को उत्पन्न करके उसका अन्त ही कर देते हैं। फिर ऐसे भयानक और हानिकारक भोजन की आवश्यकता ही क्या है? हमें ऐसा सात्विक, पौष्टिक और लाभप्रद भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे शरीर को सुख, शान्ति और आनन्द मिले।*
_―(अण्डे में विष नामक पुस्तक से साभार)_
_―ले० श्री विष्णु कविरत्न_

एक बार फिर से सुभाष माँगता है देश

घोर अंधियार है उजास मांगता है देश ,

पतझड़ छाया  , मधुमास मांगता है देश !

कुर्बानियो का एहसास मांगता है देश ,

एक बार फिर से सुभाष मांगता है देश !!

चंद काले पन्ने फाड़े गए हैं किताब से

इतिहास को सजाया खादी और गुलाब से

पूछता हूँ क्यूँ सुभाष का कोई पता नहीं

कैसे कहूँ बीती सत्ता की कोई खता नहीं

एकाएक वो सुभाष जाने कहाँ खो गए

और सारे कर्णधार जाने कहाँ सो गए

मानो या ना मानो फर्क है साज़िशो और भूल में

कोई षड़यंत्र छुपा है समय की धूल में

गांधी का अहिंसा मंत्र रोता चला जा रहा

देखिये ये लोकतंत्र सोता चला जा रहा ,

आज़ादी कि हत्या में सभी क्यों मौन है

इनकी ख़ुदकुशी के जिम्मेदार कौन कौन है

अभी श्वेत खादी कि ये आंधी नहीं चाहिए

दस बीस साल तक गांधी नहीं चाहिए

सोये हुए शेर कि तलाश मांगता है देश

एक बार फिर से सुभाष मांगता है देश

ढाल और खड्ग बिन गाथा को गढा गया

आज़ादी का स्वर्ण ताज खादी से मढ़ा गया

लाल किले में लगा दी क्यारियां गुलाब की

तारे जा के बैठे हैं जगह आफताब की

आज़ादी कि नीव को लहू से था भरा गया

मिली नहीं थी भीख में आज़ादी को वरा गया

कितने जाबांज बाज धरती में गड गए

किन्तु श्रेय को ले कपोत उड़ गए

कहते हो बैठे थे सुभाष जिस विमान में

हो गया है ध्वस्त वो विमान ताइवान में

सूर्य के समक्ष वक्ष तान घटा छा गयी

भाग्य कि कलम स्याही से कहर ढा गयी

दिव्य क्रान्ति ज्योत को अँधेरा आ के छल गया

बोलते हो सूर्य पुत्र चिंगारी से जल गया

आप से वो जली हुई लाश मांगता है देश

एक बार फिर से सुभाष मांगता है देश!!

जय हिंद।