Saturday, March 10, 2012


शिवाजी उस समय अपने सेनापतियों के साथ शासन-व्यवस्था के संबंध में बातचीत कर रहे थे। वह सेनापति उन्हें प्रणाम कर बोला, ''महाराज! कल्याण में प्राप्त एक सुंदर चीज आपको भेंट कर रहा हूं।'' और उसने उस पालकी की ओर इंगित किया।

 शिवाजी ने ज्योंही पालकी का परदा हटाया, उन्हें एक खूबसूरत मुगल नवयौवना के दर्शन हुए। उनका शीश लज्जा से झुक गया और उनके मुख से निम्न उद्गार निकले- " काश! हमारी माताजी भी इतनी खूबसूरत होतीं, तो मैं भी खूबसूरत होता! "

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