कैसे कह दू आज़ाद हु मै
बार -बार ये ख्यालआता है
किसान भूखा सोता है
मजदूर का बेटा रोता है
2 वक़्त की रोटी नहीं मिलती
लाखो टन अनाज यहाँ सड़ता है
वो AC मै बैठकर महंगाई बढ़ाते है
कड़ी मेहनत कर के जब सर्दी मै भी इंसान पसीना पोछता है
वो मिनरल water को दारू मै मिलकर पीते है
2 बूंद पानी के लिए लोग आसमान मै बदल को तरसते है
कैसे कह दू आज़ाद हु मै
बार -बार ये ख्यालआता है ....
मौत आसान लगती है किसान को
ज़िन्दगी यहाँ जीने से
और पढ़ा लिखा आदमी यहाँ
नक्सलवादी बन जाता है
कहते है वो हमको CBI की जाँच होगी
मासूम बच्चो को जब
निठारी कांड खा जाता है
ज़िन्दगी की उनकीनजरो मै
जब कोई कीमत ही नहीं
कैसे कह दू आज़ाद खुद को
जब आज़ादी दिखती नहीं
कल रात चैन की नींद सोये कई लोग,
भले कुछ लोग हमेशा के लिए सो गए,
आज़ादी के बाद हम सबको ,
शायद आदत हो गयी है सोने की!
कल रात पानी बहा कुछ लोगो का,
कुछ लोग फिर छलनी हो गए ,
पानी ही बहता है हर शरीर से अब,
क्योकि खून शायद पानी हो गया हम सब का !
कल रात फिर नेताजी आये,
कहने तीन ही ब्लास्ट हुए ,
चैन की नींद सो जा...
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।
Saturday, October 15, 2011
Friday, October 14, 2011
Thursday, October 13, 2011
जाने किस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा.
हमको पता ना था सूरज बचकानी भाषा बोलेगा,
जाने किस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा.
अभी तलक तो सिंहासन को गूंगा-बहरा देखा है
भारत माँ के चहरे पर आंसू को ठहरा देखा है
अभी तलक तो सन 47 को ए के 47 से डरते देखा है,
अभी तलक संविधान को नेता के घर पालिश करते देखा है,
अभी तलक तो खुद्दारी को गद्दारी का पानी भरते देखा है,
अभी तलक तो शेरो को कुत्तो मे घिर कर जान बचाते देखा है,
जाने किस दिन इस देश का पौरुष खौलेगा,
जाने किस दिन जनमानस तूफानी भाषा बोलेगा
अभी तलक तो चोले ने चोली की भाषा बोली है
जाने किस दिन युग का युवा वर्ग मर्दानी भाषा बोलेगा
अभी तलक मुस्कानों ने रोने की भाषा बोली है
अभी तलक तो डोली ने अर्थी की भाषा बोली है
जिस दिन बाहें भीमबली की, दुस्साशन को खीचेंगी
जिस दिन कोई पांचाली दुस्साशन को पीटेगी,
जिस दिन जनता विषबेलो को तेज़ाबो से सींचेगी,
जिस दिन जनता भ्रष्टाचार ी को संसद से खीचेगी,
जिस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा
उस दिन जयचंदों का गिरोह जान बचा के भागेगा
उस दिन भारत माँ का मस्तक चमकेगा
जिस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा !
जाने किस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा.
अभी तलक तो सिंहासन को गूंगा-बहरा देखा है
भारत माँ के चहरे पर आंसू को ठहरा देखा है
अभी तलक तो सन 47 को ए के 47 से डरते देखा है,
अभी तलक संविधान को नेता के घर पालिश करते देखा है,
अभी तलक तो खुद्दारी को गद्दारी का पानी भरते देखा है,
अभी तलक तो शेरो को कुत्तो मे घिर कर जान बचाते देखा है,
जाने किस दिन इस देश का पौरुष खौलेगा,
जाने किस दिन जनमानस तूफानी भाषा बोलेगा
अभी तलक तो चोले ने चोली की भाषा बोली है
जाने किस दिन युग का युवा वर्ग मर्दानी भाषा बोलेगा
अभी तलक मुस्कानों ने रोने की भाषा बोली है
अभी तलक तो डोली ने अर्थी की भाषा बोली है
जिस दिन बाहें भीमबली की, दुस्साशन को खीचेंगी
जिस दिन कोई पांचाली दुस्साशन को पीटेगी,
जिस दिन जनता विषबेलो को तेज़ाबो से सींचेगी,
जिस दिन जनता भ्रष्टाचार ी को संसद से खीचेगी,
जिस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा
उस दिन जयचंदों का गिरोह जान बचा के भागेगा
उस दिन भारत माँ का मस्तक चमकेगा
जिस दिन लाल किला मर्दानी भाषा बोलेगा !
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