Sunday, April 15, 2012

भारत के अन्तिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान


जन्म:- भारत के अन्तिम प्रतापी हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय, का जन्म गुजरात के अन्हिलवाड़ा नामक स्थान पर दिनांक 7 जून, 1166 ज्येष्ठ कृष्ण 12 वि. स. 1223 को हुआ था। उनके पिता का सोमेश्वर चौहान और माता का नाम कमला देवी कर्पूरी देवी तंवर था, जो कि अजमेर के सम्राट थे। कमला देवी की बड़ी बहिन सुर सुन्दरी, कनौज के राजा विजयपाल जयचन्द राठौड़ की पत्नी थी। पृथ्वीराज के जन्म के समय ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि पृथ्वीराज बड़े-बड़े राजाओं का घमण्ड चूर करेगा और कई राजाओं को जीतकर दिल्ली पति चक्रवर्ती सम्राट बनेगा।


बाल्यकाल:-  जब पृथ्वीराज 11 वर्ष के थे, तब उनके पिता सोमेश्वर का वि.स. 1234 में देहांत हो गया। इस प्रकार 14 वर्ष की आयु में इनका राजतिलक कर उन्हें राजगद्दी पर आसीन किया गया। पृथ्वीराज की आयु कम होने के कारण उनकी माता ने प्रधानमंत्री केमास की देखरेख में राज्य का कार्यभार संभाला और पुत्र को शिक्षित किया।  पृथ्वीराज ने 25 वर्ष की आयु तक कुलगुरू आचार्य से 64 कलाओं, 14 विद्याओं और गणित, युद्ध-शास्त्र, तुरंग विद्या, चित्रकला, संगीत, इंद्रजाल, कविता, वाणिज्य, विनय तथा विविध देशो की भाषाओं का ज्ञात प्राप्त किया। पृथ्वीराज को शब्द-भेदी धनुर्विद्या उनके गुरू ने देकर आशीर्वाद दिया था कि ‘‘इस शब्द-भेदी बाण-विद्या से तुम विश्व में एक मात्र योद्धा कहलाओगे और धनुर्विद्या में कोई तुम्हारा मुकाबला नहीं कर पाएगा और तुम चक्रवर्ती सम्राट कहलाओगे।’’  इस प्रकार ज्योतिषियों की भविष्यवाणी के तदनुसारसार पृथ्वीराज ने अपने दरबार के 150 सामंतों के सहयोग से छोटी सी उम्र में दिग्विजय का बीड़ा उठाया और चारों दिशाओं के राजाओं पर विजय प्राप्त कर चक्रवर्ती सम्राट बन गया।

जरा जान ले मित्रों:


निर्मल बाबा ने नौ जनवरी को 20 करोड़ रु. का फिक्स्ड डिपॉजिट किया।
> 11 जनवरी को पांच करोड़ रु. का फिक्स्ड डिपॉजिट किया।
>बैंक में जमा रकम से सूद के 85.77 लाख रुपए मिले।
>दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में बाबा ने अक्षरा होटल खरीदा।
>होटल पर अभी निर्मल बुटिक होटल का बोर्ड लगा है।
>निर्मल बाबा होटल की चेन भी खोलना चाहते थे।

चैनलों के मुताबिक बाबा का एक खाता निर्मलजीत सिंह नरूला के नाम पर भी है। इसका अकाउंट नंबर (1546000102129694) विज्ञापनों में नहीं दिखाया जाता। इस खाते में ४ जनवरी से 13 अप्रैल 2012 के बीच 123 करोड़ रुपए जमा हुए थे। इस दौरान 105.56 करोड़ रुपए निकाले भी गए। निकासी 16 बार हुई है। 13 अप्रैल शाम तक खाते में 17.47 करोड़ थे।

do the dew, death is near to u.


Thursday, April 12, 2012

ढोंगी निर्मल बाबा कि पोल खुली


*नागपुर. *अजीबोगरीब उपाय बता कर लोगों की किसी भी तरह की समस्‍याएं सुलझाने
का दावा करने वाले निर्मल बाबा की मुसीबतें बढ़ती लग रही हैं। उनके खिलाफ जहां
एक के बाद एक शिकायतें दर्ज हो रही हैं, वहीं अब उन्‍हें खुले आम चुनौती भी दी
गई है। उन पर पैसे देकर लोगों से अपना महिमा मंडन कराने वाले बयान दिलवाने के
आरोप भी लग रहे हैं।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का कहना है कि निर्मल बाबा दैविक शक्ति का दावा
करके लोगों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। यहां जारी बयान में समिति के
कार्याध्यक्ष उमेश चौबे व हरीश देशमुख ने आरोप लगाया कि निर्मल बाबा का दैविक
शक्ति का दावा खोखला, निराधार व धार्मिक प्रवृत्ति के कट्टरपंथी लोगों के लिए
मानसिक रूप से गुमराह करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी चैनलों पर
नकली भक्तों को पेश कर बाबा अपनी वाहवाही कराते हैं। समिति ने टीवी चैनलों पर
चल रहे इन विज्ञापनों
पर<http://www.bhaskar.com/article/NAT-nirmal-baba-samagam-occupies-25-ho...>
पाबंदी
लगाने की मांग केंद्र सरकार से की है। उन्‍होंने कहा कि यदि बाबा के पास
वास्तव में चमत्कारिक शक्तियां हैं, तो वह अपनी शक्तियों के बल पर एक पापड़ भी
तोड़ कर दिखा दें तो समिति उन्‍हें 15 लाख रु. इनाम देगी।
उधर, लखनऊ<http://www.bhaskar.com/article/NAT-who-is-nirmal-baba-3098583.html?HT1a=>
और

Wednesday, April 11, 2012

मैकोले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है

वो, उसमे वो लिखता है कि "इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे
निकलेंगे जो देखने
में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे और इन्हें
अपने देश के बारे
में कुछ पता नहीं होगा, इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ
पता नहीं होगा,
इनको अपने परम्पराओं के बारे में कुछ पता नहीं होगा,
इनको अपने मुहावरे नहीं
मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले
ही चले जाएँ इस देश
से अंग्रेजियत नहीं जाएगी "
*Indian Education Act -* 1858 में Indian
Education Act बनाया गया | इसकी ड्राफ्टिंग लोर्ड
मैकोले ने की थी | लेकिन उसके पहले उसने यहाँ (भारत) के
शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था, उसके पहले
भी कई अंग्रेजों ने भारत के शिक्षा व्यवस्था के बारे में
अपनी रिपोर्ट दी थी | अंग्रेजों का एक
अधिकारी था G.W.Litnar और दूसरा था Thomas
Munro, दोनों ने अलग अलग इलाकों का अलग-अलग समय
सर्वे किया था |