Showing posts with label Jaihind. Show all posts
Showing posts with label Jaihind. Show all posts

Wednesday, February 22, 2012

जो लोग सोचते हैं कि मै राष्ट्र के लिए कुछ नहीं कर पाया ...ऐसे युवाओं को एक सुझाव है -
..आप लोग अपने आस पास ..अपने हर मिलने वाले से ...... ठेल पर खड़े होकर गोलगप्पे खाते समय ... राष्ट्र के बारे में भी बात करेंगे!!
अपनी निजी जिंदगी से राष्ट्र की बातें गायब रहती हैं ... इसलिए तो ये हाल है
आप देश के प्रति लोगों को उकसा सकते हैं ... किसी औरकी खातिर नहीं अपनी माँ - भारत माँ कि खातिर!! वंदे मातरम

Friday, December 9, 2011

जंगल को बना कर सूखे का ढेर अब वो माचिस बनाने वालों से कह रहे हैं
अपनी हदों में रहो, आग लगने का डरहैं
ैकल तक इन्ही माचिसों से जला कर आग तुमने भी बहुत हाँथ सेके हैं
और आज कह रहे हैं, देख कर यहाँ हमारा भी घर है
हम तो हर बार जले तुम्हारी लगाईं आग में, मौका तुम्हारा पहला है
अब शायद समझ सकोगे हमारे दिल का दर्द, जब दिल तुम्हारा दहला है
माहौल सूखे का है, हवाएं भी गर्म हैं, चिंगारी कहीं से भी लग सकती है
माचिस की तीली मिले न मिले, ये जंगल की आग है कभी भी भड़क सकती है
हम भुझाना भी चाहें तो हमारे बस में नहीं
तुम्हारी लगाईं आग के धुएं ने हमारी आँखों का पानी तक सुखा दिया
पर हो सके तो माफ़ करना ये हमवतनो
सच्चाई बयाँ करतेकरते भावनाओं मेंआकर गर दिल तुम्हारा दुखा दिया
वक़्त अभी भी है संभल जाओ ये आग का खेल बुरा है सबके लिए
वर्ना जंगल तो जलकर ही पनपा है कभी बदलाव तो कभी हक के लिए
हो सके तो कभी सोचना कि आखिर ये माहौल बना ही क्यूँ ???
हमने आतंकी पाले, जेलो मे परसी विरयानी
हर सैनिक कि विधवा रोई, आखों मे आया पानी
बीस खून करके भी वे सब छमादान पा जाते हैं
और शहीदों कि कुरवानी पर बादल छा जाते हैं!
उठो नया कानून मांग लो संसद कि दिवारो से
हत्यारो को छमादान अव नही मिले दरबारो से
इन को सीधा फाँसी टांगे वीर शहीदोंकि माएँ
या सिने पर गोलि मारे बस सैनिक कि विधवाये

Sunday, December 4, 2011

किसे पुकारें?
जितने फन
उतनी फुफकारें,
इस संकट में किसे पुकारें?
सभी
यहाँ हैं जहर उगलते,
बात-बात में रोज़ उबलते,
जितने सर उतनी तलवारें,
इस संकट में किसे पुकारें?
कौन
यहाँ है खेवनहारा,
कौन लगाए हमें किनारा,
टूट गई सबकी पतवारें,
इस संकट में किसे पुकारें?
सभी
खून में सने हुए हैं,
बिना वजह ही तने हुए हैं,
गूँज रही सबकी ललकारें,
इस संकट में किसे पुकारें?
- मधुसूदन साहा

Wednesday, November 2, 2011

मेरे ख्याल से जो प्रिंट मीडिया मेहैं उनका बौद्धिकस्तर सही है, लेकिन जो इलेक्ट्रोन िक मीडिया मे हैं, वो हमे बुद्धि मे आम आदमी से ज़्यादा कंगाल लगते हैं. मिसाल के तौर पर इनकी न्यूज़ क्या होती है? कोई भविष्य बता रहा होता है, तो कोई 2012 मे दुनिया खत्म कर देता है, तो कोई ये बताता है कि धोनी किस सैलून मे बाल कटवाता है और अगर किसी को शक हो तो वो एक पूरा दिन देश का तथा कथित सर्व श्रेष्ठ न्यूज़ चैनल देख ले."

Monday, October 31, 2011

मूर्ती पूजा से हानिया

मूर्ती पूजा से हानिया
१-; सन ७१२ में भारत पर पहला आक्रमण मुहम्मद बिन कासिम ने किया . तब राज्य केमुख्य मंदिर का पुजारी कासिम से मिल गया . मंदिर काझंडा झुका दिया और राजा से कह दिया की झंडा झुकने का अर्थ है की देवी नाराज हो गई है और हमें कासिम से संधि कर लेनी चाहिए राजा भोला भाला था और मूर्ती पर पूरा विश्वास करता था राजा को संधि के बहाने पुजारी बहार ले आया और राज्य पर कासिम का कब्ज़ा करवा दिया आज की कीमत में लगभग साठ अरब की लूट थी
२-; सन १०२४ में महमूद गजनवी ने सोमनाथ के मंदिर पर आक्रमण किया . पुजरिओं ने राजा को लड़ने नहीं दिया कह दिया की mahaadev सबको भस्म कर देंगे . महमूद का सोमनाथ पर कब्ज़ा हो गया लाखों हिन्दू क़त्ल किए गए माता बहनों की बेइज्जती हुई खरबों की लूट हुई .
३-; मूर्ती को खुश करने के लिए बलि के रूप में nirpraadh लाखों पशुओं की निर्मम हत्या की जाती है. केरल में मंदिर पर गरीब आदिवासी अपनी लड़किओं जो दस से बीस साल की होती हैं devdaasi के रूप में छोड़ जाते हैं unke साठ पण्डे व पुजारी गलत काम करते हैं यहाँ तक की वेश्याओं को बेच देते हैं . यदिमूर्ती कुछ करती तो उसके देखते देखते यह अनर्थ कैसे हो जाता है मूर्ती पूजक उसकेcharitra की पूजा नहीं करते केवल मूर्ती की पूजा ही कर लेते हैं

Sunday, October 30, 2011

जब भी किसी बड़े केस की सुनवाई हो रही होती है तोह हमारे देश में केवल दो ही बातें सामने आती है,"फैश्ले को अभी सुरक्षित रखा गयाहै" और दूसरा"सुनवाई फन्ना तारिक तक के लिए टाल दी गई है"!
क्या कभी ऐसा गिसा पिटा फैश्लाकरने वाले जज की सेलरी (वेतन) सुरक्षित रखा गया???
क्या माह के आखिर में आने वाली उसकी सेलरी को टाला गया है? नहींना!!!! तोह इनको सुनवाई टालने का हक़ किसने दिया??
जिस देश में पहले से ३० लाख केस पेंडिंग और ५ लाख केस री-ओपन की बातचल रहे हो उस देश में एक फैश्ला लेने में इतनी देरी क्यों लगती है!
मुझे कोई हमदर्दीनहीं राजीव गांधीके हत्या के आरोपी को क्या सज़ा मिलती है और क्या नहीं, लेकिन एक फैश्ला करने में हमारे कोर्ट को १८-१९ साल लग गए?
बच्चा भी ९ महीने में पैदा हो जाता है, लेकिन हमारी न्यायपालिक ा तोह बच्चे के बच्चे को बुढा कर देती है!
-akhilesh sharma

Saturday, October 29, 2011

विरोध के बहुत से तरीके होते है! केवल अन्ना हजारेकी तरह मंच पे आके भूखे लेट जाना और अपने आस पास लोगो को जमा कर देना ही काफी नहीं होता!
आप बिना हथियार उठाये सरकार की कमर तोर्ड सकते है!
आप फिल्मो का विरोध करना शुरू कर दीजिये! जो टैक्स सरकार को जाता है "मनोरंजन कर" के नाम पर वोह जाना बंद हो जाएगा! इससे फ़िल्मी जगत की बड़ी हस्तियों कासरकार पर दवाब बढेगा की जनता की सही मांगो को मानो!
विदेशी कंपनी का विरोध कीजिये, उनके उत्पाद को कितनी भी सस्ती कीमत पर ना ले! इससे विदेशी कंपनी से मिलने वाले फंड बंद हो जायेंगे! आज की तारीख में हम विश्व पटल पर सबसे बड़े बाज़ार है जिसपे दुनिया भर के सभी विकशित देशो की नज़र है!
चुनाव आयोग को और राष्ट्रपति को ख़त लिखना शुरू कर दीजिये की जितनी भी राजनितिक पार्टी है उसे जल्द से जल्द भंग करे, और नई नई राजनितिक पार्टियों की स्थापना करे! और ध्यान रहे की इन सभी नई राजनितिक पार्टी में कोई भी पुरानी राजनितिक पार्टी का नहीं होना चाहिए और ना कोई उससे सम्बंधित!
क्रिकेट को देखनाऔर वहा जाके देखना पूरी तरह से बंद कर दीजिये, भले ही आपके न्यूज़ चैनल उनकोलेके कितना भी उत्साहित होके दिखाए!
सरकार ने आरक्षण के झासे में सभी देश को बाट रखा है!सभी को आगे आके उसका विरोध करना चाहिए! ऐसा करने से सरकार के पास सिमित वोट बेंक खतम हो जाएगा और वोह पुरे देश के लिए काम करेगी!
जनता के पास बहुत से तरीके होते है अपनी ही सरकार को पंगु बना देने का! क्युकी सरकार देशकी जनता से है, जनता देश की सरकार से नहीं!

Thursday, October 27, 2011

पूजे न शहीद गए तो फिर....!

पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा ?
तोपों के मुँह से कौन अकड़ अपनी छातियाँ अड़ाएगा??
चूमेगा फन्दे कौन, गोलियाँ कौन वक्ष पर खाएगा ???
अपने हाथों अपने मस्तक फिर आगे कौन बढ़ाएगा ????
पूजे न शहीद गए तो फिर आजादी कौन बचाएगा ?????
फिर कौन मौत की छाया में जीवन के रास रचाएगा ??????
पूजे न शहीद गए तो फिर यह बीज कहाँ से आएगा ???????
धरती को माँ कह कर,मिट्टी माथे से कौन लगाएगा ???????
"खामोशी से रहना वर्दाश्त नहीं मुझे
मरूंगा तो भी सन्नाटा तोड़ जाऊंगा ,
शीशा हूँ टूटूंगातो बिखरूंगा
जीता हूँ हनक के साथ,
टूटूंगा खनक के साथ
खनक के साथ खामियाजा छोड़ जाऊंगा." ---- राजीव चतुर्वेदी