Sunday, February 24, 2013

शिक्षक

जो सच्चा शिक्षक होता है वह जानता है कि वस्तुत: कोई किसी कि सहायता नही कर सकता| मनुष्य के स्वं के लिए जो करणीय है उसे कोई दूसरा उसके लिए नहीं कर सकता| किसी दूसरे का करना उचित भी नहीं होगा| शिक्षक तो छात्र को सिर्फ प्रोत्साहित कर सकता है| जिससे कि वह अपनी स्वं कि सहायता करे और उसके इस आत्म-विकास में आने वाली बाधाओं को शिक्षक ही दूर कर सकता है| छात्र को अपने पैरों पर खड़ा होकर स्वभिलाम्बी बनना पड़ेगा, उसको अपना विकास स्वं करना पड़ेगा.....

रामसेतु का सच..

राम सेतु कि जो तस्वीरें नासा ने सेटलाईट के जरिये भेजी हैं उनमे ये दिखता है कि पत्थरों को चूने से और कीलों से जोड़ा गया है.. और वो धातु इतनी बेहतरीन है कि लाखो सालो बाद भी नहीं गली..

Wednesday, February 6, 2013

JAI HO NAMO


राजीव भाई के प्रचार का एक और माध्यम : छोटा मेमोरी कार्ड



राजीव भाई के 172 घंटे के व्याख्यानों का संग्रह 2 GB के इस कार्ड में जो पहली बार दिल्ली के विश्व पुस्तक 


मेले में सभी के लिए 150 रू. की लागत मूल्य |

पर उपलब्ध है ..

Saturday, December 8, 2012

एक चिंतन:


समता मूलक समाज का निर्माण करने के लिए देश पर शासन करने वाले और देश के लिए नीतियां बनने वाले लोगो का देश कि जनता के साथ सीधा रिश्ता होना चाहिए| लेकिन जो शासकगण हैं, जो देश के लिए नीतियां बनाते हैं, जो संपन्न हैं, जो उच्च वर्ग हैं वो शहरों में रहते हैं, वे जनता से बिलकुल दूर हो गए हैं.| 

जब वे बच्चे होते हैं तो अलग स्कूलों में पढते हैं, और जब उनके बच्चे होते हैं तो वो भी इन्ही स्कूलों में पढते हैं| इस वर्ग को क्या मालूम की टाटपट्टी पर स्कूलों कि टपकती हुई छत के नीचे बैठने का क्या मतलब होता है? ये क्या जाने कि पेशाब की बदबू और कक्षा कि पढाई में क्या रिश्ता है? इस वर्ग का बच्चा घर आकार अपने पिता से शिकायत नही करता कि मास्टर उसपर झुंझलाहट निकालता है| हमारे देश के निति-निर्माता वर्ग को ये सब भोगना नहीं पड़ता, इसलिए कुछ चुनिन्दा स्कूलों पर तो करोडो रूपये  खर्च किये जाते हैं और जिन पाठशालाओं में करोड़ों बच्चे पढते हैं वे उपेक्षा का शिकार बनी रहती हैं|

जिस देश में "कॉन्वेंट" स्कूल नहीं होगा, और शासक वर्ग का बच्चा भी टाटपट्टी स्कूल में पढ़ेगा और घर आकार स्कूल की बदबू की, अँधेरे की, पिटाई की चर्चा करेगा, उस दिन देश कि शिक्षा का नक्शा बदल जाएगा|
जिस दिन रेल कि तृतीय श्रेणी में मंत्री धक्के खायेगा, अफसर को टॉयलेट के पास खड़े होकर रात काटनी पड़ेगी और नेता को दरवाजे से लटक कर सफर करना पड़ेगा, उस दिन देश कि रेलों कि दशा सुधारने के लिए सही चिंतन कि शुरुआत होगी....
वन्देमातरम....