Friday, December 6, 2013

बाबरी मस्जिद ध्वंस

बाबरी मस्जिद ध्वंस
हिन्दू भाइयों 6 दिसंबर को हर साल हम शौर्य दिवस मानते हैं॥
मगर जरा सोचें,इसके पीछे कितने बलिदान हुए, कितनी माताओं ने अपने पुत्र खोये ,
कितनी बहने आज भी विधवा हो कर जी रही है ,...?
क्या हुआ होगा उस बाप का जिसने अपने दो दो बेटो की गोलियों से छलनी हुआ लाश को देखा...??
ये सब किया तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस और उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने॥ रामभक्तों को गोलियो से छलनी कर उनके शरीर मे बालू के बोरे बांध कर उनकी लाश सरयू मे फेक दी गयी । सोचिए क्या बीती होगी उस परिवार पर जिसने किसी अपने की सड़ी गली और जानवरो की खाई हुई लाशें यमुना से कई हफ़्तों बाद निकाली होगी कार सेवको को हेलीकाप्टर से चुन चुन कर निशाना बनाया गया,और गोली आँख मे या सर मे मारी गयी ॥ क्यू ???
क्यूकी हम हिंदुस्थान के हिन्दू थे ॥ आज वर्षो बाद ये वीडियो मिला ॥शायद हृदय विदारक है मगर आप से अनुरोध है इसे एक बार जरूर देखें और जाने की वो अयोध्या जो बाबर के औलादों के चंगुल मे थी किस प्रकार के बलिदान दे कर हमारे हिन्दू वीरो ने मुक्त कराया ॥ मै यहाँ आज मुल्ला यम सिंह के गोलीकांड के दो वीडियो पोस्ट कर रहा हूँ जो आज से 22 साल पुराने हैं और इसे देखने वाले को कभी इस वीडियो पर सरकार ने बैन लगा रखा था ।
http://www.vikalpseva.org/2012/12/1990.html
1 पहले वीडियो मे : किस प्रकार पुलिस सैकड़ो कारसेवको की हत्या कर रही है । किस प्रकार एक लाल ट्रक मे अंगिनतों लाशों को मुल्ला यम की पुलिस सबसे बचाकर ले जा रही है । कार सेवको की लाशों से पटी एक गली। घरो से निकालकर गोली मारने वाले पुलिस वाले ॥ गोली लगने के बाद मरते मरते भी “जय श्री राम” बोलते अमर बलिदानी कार सेवक प्रत्यक्षदर्शी लोग और घरो से निकाल कर मारे गए कारसेवको की लाशें॥
इससे पहले कि सरकार इन विडियो पर बेन लगा दे एक बार जरुर देखे और शेयर करे क्योकि बिकाऊ मीडिया को इस मामले में साँप सूंघ जाता है।

Monday, December 2, 2013

राजीव दीक्षित जी को जानिये।

नकली नोट

भारत का नोट छापने
वाली विदेशी कंपनिया ही भेज रही 1000/500
के डुप्लीकेट नोट जो भारत के
बरबादी का कारन बन रही हैं......
सुनने में आ रहा है की केरल में 4 कंटेनर भर के
1000 रुपये की जर्मनी में प्रिंटेड करीब 12000
करोड़ रुपये के नोटों की गड्डियों का 120 टन
(1 किलो में 10 लाख) नोट सितम्बर अंतिम
सप्ताह में पकड़ा गया और यह खबर सिर्फ
किसी एक केरल के अखबारों में भी आया है और
बाद में यह खबर दबा दी गयी है. भारत में
यही हो रहा है..मेहनत करके 100/-
रुपया कमाया जाता है और छपाई कराकर करोडो-
अरब रुपये भारत में लाकर भारत और भारत के
लोगो को तबाह किया जाता है..
भारत की मुद्रा रुपये के 1000 और 500 के
नोटों की गद्दिया यूरोप में टनों टन में
ट्रेलर में ढोई जा रही है और हम चिंता कर रहे
हैं की रुपया गिर क्यों रहा है, भारत में
यही रुपया कंटेनरों में भर भर के आ रहा है
जो एक दम असली नोट हैं कोई फर्क नहीं कर
पायेगा क्योकि बनाने वाली वही कम्पनी है
जो भारत की असली नोट सप्लाई कर रही है.
भारत के नोट अन्य देशो के अलावा फ्रांस और
जर्मनी में भी छापे जा रहे हैं, डे ला रू
कंपनी आज के दिन 70 देशो की करंसी छाप
रही है. यही कंपनी जाली नोट पकड़ने की मशीन
भी बनाती हैं, और जाली नोट भी. यह
विदेशी यूरोपीय ईसाई देशो की बहुत
बड़ी साजिस है की भारत का एक पौंड में 85/-
रुपया मिल रहा है और भारत दुनिया सबसे
बड़ा गोमांस निर्यातक देश बन चुका है जिससे
की डालर की वजह से ५० गुना हो चुके भारत के
45 लाख करोड़ के कर्जे को पटाया जा सके.
स्विट्जरलैंड का खरबपति"राबर्टो गेयरो"
की कंपनी"डेला रू"भारत के बड़े नोट छापती है
और यह वही आदमी है जो"तालिबान
द्वारा अपहरण करके कंधार ले जाए गए इंडियन
एयरलाइन्स के विमान में सवार था जो काबुल से
वापस स्विटजरलैंड चला गया".
इतनी अंदरूनी खबर भारत की
मिडिया कभी नहीं दिखायेगी.
इस समस्या का एक मात्र स्थाई समाधान है -
अर्थक्रंती प्रस्ताव को तुरंत लागु
किया जाये, और संतोष की बात है
की बीजेपी इसे लागु करने जा रही है.

जगन्नाथ पूरी के रहस्य

पुरी में जगन्नाथ मंदिर के 8 अजूबे इस प्रकार है।

1.मन्दिर के ऊपर झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराते हुए।

2.पुरी में किसी भी जगह से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेगे तो वह आपको सामने ही लगा दिखेगा।

3.सामान्य दिन के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है, और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पूरी में इसका उल्टा  होता है.
4.पक्षी या विमानों मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पायेगें।

5.मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य है.

6.मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए  रहती है।  प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी यह व्यर्थ नहीं जाएगी, चाहे कुछ हजार लोगों से  20 लाख लोगों को खिला सकते हैं.

7. मंदिर में रसोई (प्रसाद)पकाने के लिए 7 बर्तन एक दूसरे पर रखा जाता है और लकड़ी पर पकाया जाता है. इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ  एक के बाद एक पकते जाती है।

8.मन्दिर के सिंहद्वार में पहला कदम  प्रवेश करने पर (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि नहीं सुन सकते. आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें जब आप इसे सुन सकते हैं. इसे शाम को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

साथ में यह भी जाने:-
मन्दिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोइ घर है।

प्रति दिन सांयकाल मन्दिर के ऊपर लगी ध्वजा को मानव द्वारा उल्टा चढ़ कर बदला जाता है।

मन्दिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट में है।
मन्दिर की ऊंचाई 214 फिट है।

विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद को बनाने 500 रसोईये एवं 300 उनके सहयोगी काम करते है।
" जय जगन्नाथ
जय जय जगन्नाथ "

Saturday, November 30, 2013

राजीव भाई जी का जीवन परिचय।

जीवन परिचय
राजीव दीक्षित का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़
जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में राधेश्याम
दीक्षित एवं मिथिलेश कुमारी के यहाँ 30 नवम्बर
1967 को हुआ था। फिरोजाबाद से इण्टरमीडिएट तक
की शिक्षा प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने
इलाहाबाद से बी० टेक० तथा भारतीय
प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से एम० टेक०
की उपाधि प्राप्त की। वे टेलीकम्यूनीकेशनमें उच्च
शिक्षा प्राप्त करना चाहते थे।अपनी इस
इच्छा को पूर्ण करने हेतु उन्होंने कुछ समय भारत के
सीएसआईआर तथा फ्रांस के टेलीकम्यूनीकेशनसेण्टर
में
काम भी किया। तत्पश्चात् वे भारत के पूर्व
राष्ट्रपति डॉ० ए पी जे अब्दुल कलाम के साथ जुड़
गये।
कलाम साहब उन्हें एक श्रेष्ठ वैज्ञानिक के साँचे में
ढालने ही वाले थे किन्तु राजीव ने जब बिस्मिल
की आत्मकथा का अध्ययन
किया तो अपना पूरा जीवन ही राष्ट्र-सेवा में
अर्पित कर दिया। उनका अधिकांश समय महाराष्ट्र
के वर्धा जिले में प्रो० धर्मपाल के कार्य को आगे
बढ़ाने में व्यतीत हुआ।
सन् 1999 में राजीव के
स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम
मचा दी थी। पिछले कुछ महीनों से वे लगातार गाँव
गाँव शहर शहर घूमकर भारत के उत्थान और देश
विरोधी ताकतों व भ्रष्टाचारियों को पराजित करने
के लिए जन जागृति पैदा कर रहे थे। दीक्षित बिस्मिल
की आत्मकथा से इतने अधिक प्रभावित थे कि उन्होंने
बच्चन सिंह से आग्रह करके फाँसी से पूर्व उपन्यास
ही लिखवा लिया। राजीव पिछले 20 वर्षों से
बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व उपनिवेशवाद के खिलाफ
तथा स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे।
योगदान
दीक्षित ने 20 वर्षों में लगभग 12000 से अधिक
व्याख्यान दिये। भारत में 5000 से अधिक
विदेशी कम्पनियों के खिलाफ उन्होंने
स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत की। देश में सबसे
पहली स्वदेशी-विदेशी वस्तुओं की सूची तैयार करके
आम जनता से स्वदेश में निर्मित सामग्री अपनाने
का आग्रह किया। 1995-96 में टिहरी बाँध के
खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में भाग लिया और पुलिस
लाठी चार्ज में काफी चोटें भी खायीं। उसके बाद
1997 में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रख्यात
इतिहासकार प्रो० धर्मपाल के सानिध्य में अँग्रेजों के
समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके
समूचे
देश को आन्दोलित करने का काम किया। 10
वर्षों तक स्वामी रामदेव के सम्पर्क में रहने के बाद
उन्होंने 9 जनवरी 2009 को भारत स्वाभिमान ट्रस्ट
का दायित्व सँभाला।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन के समय से
ही उनके अन्दर राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने
की तमन्ना पैदा हुई। भारतीय सभ्यता और
संस्कृति पर
मँडरा रहे खतरों को लेकर आक्रोश पैदा हुआ।
माँ भारती को मानसिक गुलामी, विदेशी भाषा,
विदेशी षड्यन्त्रों से मुक्त करवाने के लिए उन्होंने
आजादी बचाओ आन्दोलन प्रारम्भ किया। अपने
राष्ट्र को आर्थिक महाशक्ति के रुप में खडा करने के
लिए उन्होंने आजीवन ब्रह्मचारी रहने
की प्रतिज्ञा की और उसे जीवन पर्यन्त निभाया।
अपने जीवन के अन्त तक उन्होंने इन
सिद्घान्तों का दृढता के साथ पालन किया।
सिद्घान्तों का पालन करते हुए अनेकों बाधायें
आयीं परन्तु उन्होंने कभी भी समझौतावादी एवं
पलायनवादी होना स्वीकार नही किया।
सिद्घान्तों के
प्रति दृढता सीखनी हो तो उनका जीवन सबके लिये
आदर्श है।
निस्सन्देह वे भारत माँ के गौरव पुत्र थे। ऐसे
ओजस्वी वक्ता जिनकी वाणी पर
माँ सरस्वती साक्षात निवास करती थी। जब वे
बोलते थे तो स्रोता घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर
उनको सुना करते थे। भारत के स्वर्णिम अतीत
का गुणगान अथवा विदेशियों के
द्वारा की गयी आर्थिक लूट का बखान करते हुए
उनका दिमाग कम्प्यूटर से भी तेज चलता था।
यदि उन्हें भारत का चलता-फिरता सुपर कम्प्यूटर
कहा जाये तो अतिशयोक्ति न होगी। विलक्षण
प्रतिभा के धनी राजीव की विनम्रता सबके ह्रदय
को छू जाती थी। भारत को विश्व की आर्थिक
महाशक्ति बनाने को संकल्पित भारत स्वाभिमान के
उद्देश्यों को प्रचारित प्रसारित करते हुए वे छत्तीसगढ
राज्य के दुर्ग जिले के प्रवास पर थे। कर्मक्षेत्र में
अहर्निश डटे रहकर उन्होंने भारत माँ को आर्थिक
गुलामी से मुक्त करवाने हेतु अपना बलिदान कर दिया।