सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।
Thursday, June 27, 2019
भारत का संविधान (pdf format)
Sunday, June 16, 2019
उपयोगी कहावतें
*A. चैते गुड़, वैसाखे तेल। जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल। । *
*B. सावन साग, भादौ दही²। कुवांर करेला, कार्तिक मही³। । *
*C. अगहन जीरा, पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना। । *
*D. जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहीं धरै। । *
*किस माह में क्या न खाएँ???*
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*आवश्यक निर्देश*
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*1. चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं। *
*2. बैसाख माह में नया तेल न लगाएं। *
*3. जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए। *
*4. आषाढ़ माह में पका बेल न खाएं। *
*5. सावन माह में साग न खाएं। *
*6. भादों माह में दही न खाएं। *
*7. क्वार माह में करेला न खाएं। *
*8. कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं। *
*9. अगहन माह में जीरा न खाएं। *
*10. पूस माह में धनिया न खाएं। *
*11. माघ माह में मिश्री न खाएं। *
*12. फागुन माह में चना न खाएं। *
*👉अन्य निर्देश👇*
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*👉1. स्नान के पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें। *
*👉2. भोजन के बाद कुछ देर बायी करवट लेटना चाहिये। *
*👉3. रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाना चाहिये। *
*👉4. प्रातः पानी पीकर ही शौच के लिए जाना चाहिये। *
*👉5. सूर्योदय के पूर्व गाय का धारोष्ण दूध पीना चाहिये व्यायाम के बाद दूध अवश्य पियें। *
*👉6. मल, मूत्र, छीक का वेग नहीं रोकना चाहिये। *
*7. ऋतु (मौसमी) फल खाना चाहिये..*
*8. रसदार फलों के अलावा अन्य फल भोजन के बाद खाना चाहिये..*
*9. रात्रि में फल नहीं खाना चाहिये। *
*10. भोजन करते समय जल कम से कम पियें। *
*11. भोजन के पश्चात् कम से कम 45 मिनट के बाद जल पीना चाहिए। *
*12. नेत्रों में सुरमा / काजल अवस्य लगायें। स्नान रोजाना अवश्य करना चाहिये। *
*13. सूर्य की ओर मुह करके पेशाब न करें। *
*14. बरगद, पीपल, देव मन्दिर, नदी व शमशान् में पेशाब न करें। *
*15. गंदे कपड़े न पहने, इससे हानि होती है। *
*16. भोजन के समय क्रोध न करें बल्कि प्रसन्न रहें। *
*17. आवश्यकता से अधिक बोलना भी नहीं चाहिये व बोलते समय भोजन करना रोक दें। *
*18. ईश्वर आराधना अवश्य करनी चाहिये। *
*🙏वर्जित वस्तुएं कब से कब तक🙏*
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*1.👉 चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं (15 March-15 April)*
*2.👉 बैसाख माह में नया तेल न लगाएं (16 April-15 May)*
*3.👉 जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए (16 May-15 June)*
*4.👉 अषाढ़ माह में पका बेल न खाएं (16 June-15 July)*
*5.👉 सावन माह में साग न खाएं (16 July-15 August)*
*6.👉 भादों माह में दही न खाएं (16 August-15 Sep)*
*7.👉 क्वार माह में करेला न खाएं (16 Sept-15 Oct)*
*8.👉 कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं (16 Oct-15 Nov)*
*9.👉 अगहन माह में जीरा न खाएं (16 Nov-15 Dec)*
*10.👉 पूस माह में धनिया न खाएं (16 Dec- 15 Jan)*
*11.👉 माघ माह में मिश्री न खाएं (16 Jan-15feb)*
*12.👉 फागुन माह में चना न खाएं (16 Feb- 14 March )*
*✍1. पंथ=रास्ता:* जेठ माह में दिन में रास्ता नहीं चलना चाहिए।
*✍2. दही=मट्ठा या दही व दही से बने पदार्थ:* ऐसी कहावत है कि भादो मास में दही या मट्ठा अगर घास या दूब की जड़ में डाल दें तो उसको भी फूक देता है। अर्थात् भादो मास में दही व दही से बने पदार्थ काफी हानिकारक हैं।
*✍3. मही=भूमि* पर कार्तिक मास में न सोए।
Saturday, June 1, 2019
Wednesday, May 29, 2019
इस तरह बचें आग से
यह मैसेज जनसाधारण के लिए है और बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे कृपया अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य और खासकर बच्चों को अवश्य पढ़ाएं और समझाएं:-
कई वर्ष पहले जे0 पी0 होटल वसंत विहार नई दिल्ली में आग की दुर्घटना हुई, जिसमें बहुत सारे भारतीय मारे गए लेकिन जापानी और अमेरिकन नहीं। जानते हैं क्यों? मैं आपको बताता हूँ:-
1. सभी अमेरिकन और जापानी लोगों ने अपने कमरों के दरवाज़ों के नीचे खाली जगहों में गीले तौलिये लगा दिए और खाली जगहों को सील कर दिया, जिससे धुआं उनके कमरों तक नहीं पहुंच सका। या बहुत कम मात्रा में पहुंचा।
2. इन सभी विदेशी मेहमानों ने अपनी नाक पर गीले रुमाल बांध लिए, जिससे उनके फेफड़ों में धुआं प्रवेश न कर सके।
3. सभी विदेशी मेहमान अपने अपने कमरों के फर्श पर औंधे लेट गए। (क्योंकि धुआं हमेशा ऊपर की ओर उठता है)
इस प्रकार जब तक अग्निशमन विभाग के कर्मचारी आये, तब तक वे अपने आपको जीवित रख पाने में सफल रहे।
जबकि होटल के भारतीय मेहमानों को इन सुरक्षा उपायों के बारे में पता ही नहीं था इसलिए वे इधर से उधर भागने लगे और उनके फेफड़ों में धुआं भर गया और कुछ समय में ही उनकी मौत हो गई।
अभी 24.05.2019 को सूरत (गुजरात) के एक कोचिंग सेंटर में आग की दुर्घटना हुई जिसमें कई बच्चों की जान इस अज्ञानता और भगदड़ के कारण हो गई। यदि उन्हें इन सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी होती तो शायद इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की जान न जाती।
याद रखें, आग लगने की स्थिति में ज़्यादातर मौतें शरीर में धुआं जाने से होती हैं, जबकि आग के कारण कम होती हैं।
क्योंकि आग की स्थिति में हम लोग धैर्य से काम नहीं लेते हैं और इधर से उधर भागने लगते हैं। भागने से हमारी सांसें तेज़ हो जाती हैं जिसके कारण बहुत सारा धुआं हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है और हम बेहोश हो जाते हैं और ज़मीन पर गिर जाते हैं तथा फिर आग की लपटों से घिर जाते हैं।
इसलिए आग लगने की स्थिति में ये सुरक्षा उपाय अपनाएं:-
1. भगदड़ न मचाएं और अपने होश कायम रखें ताकि आप दूसरों की मदद कर सकें।
2. अपने नाक पर गीला रुमाल या गीला लेकिन घना कपड़ा बांधें। तथा फर्श पर लेट जाएं।
3. यदि आप किसी कमरे में बंद हों तो उसके खिड़की दरवाज़े बंद कर दें तथा उनके नीचे या ऊपर या कहीं से भी धुआं आने की संभावना हो तो उस जगह को भी गीले कपड़े से सील कर दें।
4 अपने आसपास के लोगों से भी ऐसा ही करने को कहें।
5. अग्निशमन की सहायता की प्रतीक्षा करें। याद रखें, अग्निशमन वाले प्रत्येक कमरे की जांच करते हैं और वे फंसे हुए व्यक्तियों को ढूंढ लेंगे।
6. यदि आपका मोबाइल काम कर रहा हो तो आप लगातार 100, 101 या 102 पर मदद के लिए कॉल करते रहें। उन्हें आप अपने स्थान की जानकारी भी दें। वे आप तक सबसे पहले पहुंचेंगे।
दुर्घटना में कोई भी फंस सकता है। इसलिए सुरक्षा उपायों की जानकारी सबको अवश्य होनी चाहिए।
Tuesday, May 28, 2019
सूरत हादसा
21 बच्चे हमेशा के लिए सो गए फिर भी हम नहीं जागेंगे, हैं ना...
डूबते हुए इंसान को बचाने में बचानेवाला भी डूब जाता है...क्योंकि उसे तैरना आता है बचाना नहीं...स्विमिंग टीचर सिखातेहै कि कोई डूब रहाहो तो उसे खुद पर लदने ना दो...उसके बाल पकड़ों और घसीटकर बाहर लाने की कोशिश करो....यही तो छोटी-छोटी लाइफ स्किल हैं)
पर हम भेड़चाल वाले हैं अफसोस जताकर अगले हादसे का इंतज़ार करते हैं कि इसे भूल सकें.....अब तो अफसोस भी होता है हमें या बस रस्मन......संदेह है।
भारत स्काउट & गाइड पलवल

