Tuesday, January 26, 2021

किसकी ये जनवरी और किसका ये अगस्त है!

किसकी है जनवरी,
किसका अगस्त है?
कौन यहाँ सुखी है, कौन यहाँ मस्त है?

सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है
गालियाँ भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है
चोर है, डाकू है, झुठा-मक्कार है
कातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार है
जैसे भी टिकट मिला
जहाँ भी टिकट मिला

शासन के घोड़े पर वह भी सवार है
उसी की जनवरी छब्बीस
उसी का पन्द्रह अगस्त है
बाक़ी सब दुखी है, बाक़ी सब पस्त है…..

कौन है खिला-खिला, बुझा-बुझा कौन है
कौन है बुलन्द आज, कौन आज मस्त है?
खिला-खिला सेठ है, श्रमिक है बुझा-बुझा
मालिक बुलन्द है, कुली-मजूर पस्त है
सेठ यहाँ सुखी है, सेठ यहाँ मस्त है
उसकी है जनवरी, उसी का अगस्त है

पटना है, दिल्ली है, वहीं सब जुगाड़ है
मेला है, ठेला है, भारी भीड़-भाड़ है
फ्र‍िज है, सोफ़ा है, बिजली का झाड़ है
फै़शन की ओट है, सब कुछ उघाड़ है
पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है
गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो
मास्टर की छाती में कै ठो हाड़ है!
गिन लो जी, गिन लो, गिन लो जी, गिन लो
मज़दूर की छाती में कै ठो हाड़ है!
गिन लो जी, गिन लो जी, गिन लो
बच्चे की छाती में कै ठो हाड़ है!
देख लो जी, देख लो जी, देख लो
पब्लिक की पीठ पर बजट पर पहाड़ है!

मेला है, ठेला है, भारी भीड़-भाड़ है
पटना है, दिल्ली है, वहीं सब जुगाड़ है
फ़्रि‍ज है, सोफ़ा है, बिजली का झाड़ है
महल आबाद है, झोपड़ी उजाड़ है
ग़रीबों की बस्ती में

उखाड़ है, पछाड़ है
धत तेरी, धत तेरी, कुच्छो नहीं! कुच्‍छो नहीं
ताड़ का तिल है, तिल का ताड़ है
ताड़ के पत्ते हैं, पत्तों के पंखे हैं

पंखों की ओट है, पंखों की आड़ है
कुच्छो नहीं, कुच्छो नहीं…..
ताड़ का तिल है, तिल का ताड़ है
पब्लिक की पीठ पर बजट का पहाड़ है

किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है!
कौन यहाँ सुखी है, कौन यहाँ मस्त है!
सेठ ही सुखी है, सेठ ही मस्त है
मन्त्री ही सुखी है, मन्त्री ही मस्त है
उसी की है जनवरी, उसी का अगस्त है!
- नागार्जुन

Friday, January 22, 2021

Religious Exemption from all types of forced/compulsory vaccine and establishment of vaccine court in our state.

To, ...........................................
 ........................................
 .......................................
  Subject: Religious Exemption from all types of forced/compulsory vaccine and
 establishment of vaccine court in our state.
  Respected sir,
  With due to respect, l would like to inform you that
 I ...........................................................................................................................
 ...................................................... want Religious Exemption from all types of
 vaccine because our religion does not permit some objectionable ingredient such as
 (Fetal Bovine Serum, Pork,Cow Gelatin, Vero Cell, MRC-5 Cell, Alcohol,Aborted baby
 parts, Aluminum ) in vaccine to be injected to our body. I belong to ......................
 religion.Our religion does not permit to inject Cow,pig fetus bovine serum ,aborted baby
 parts in my Body.
 Request you to establish vaccine court in our district and state for vaccine related case filing in case of side effect of any vaccine. If in future any side effect of vaccine, public
 could easily file case/FIR/suit against vaccine company.
  The following indicates as the support of my appeal:
  1 The Supreme Court's verdict regarding HPV: Case No- 558/2012.
  2 Department related Parliamentary Standing Committee on Health and Family Welfare
 Report.
  3 The ongoing Public Interest litigation in Aurangabad Bench of Bombay High Court
 Court: Case No- 15232/2019.
  4. Under article 21 , 25-28 of the Indian constitution and international Nuremburg code .
  5 In USA there is a provision of religious exemption regarding vaccination.FBS related
 proof in www.biswaroop.com/fbs and PIL related matter is in court website Case number
  given.
  6 Dr Stanley plotking statement in supreme court america of ingredient of vaccine. link-
 http://youtube.com/watch?v=ZS0cYAFs2ps
  7 Under international Nurumberg code act and article 21 of the constitution.
 Therefore I request you to grant my family and neighbor for religious
 exemption in compulsory/forced vaccination.
   Regards, ........................................
 .....................................
 .......................................
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Monday, December 21, 2020

किसान आन्दोलन कॉर्पोरेट के खिलाफ एक निर्णायक और ऐतिहासिक आंदोलन है।

Sidarth Ramu:
पिछले 25 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने उपस्थित सबसे बड़ी चुनौती क्यों है?

1- पूरे पंजाब में यह एक जनांदोलन है। जिसे पंजाब के बहुलांश जनता का समर्थन प्राप्त है और यह समर्थन बढ़ता ही जा रहा है।

2- हरियाणा में भी यह तेजी से जनांदोलन की शक्ल ले रहा है।

3- देश के कोने-कोने से धीरे-धीरे इस आंदोलन को बड़े पैमान पर समर्थन प्राप्त हो रहा है और यह एक देशव्यापी जनांदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है।

4- अभी तक इस जनांदोलन की बागडोर उन किसानों और किसान नेताओं के हाथ में है, जो झुकने को तैयार नहीं हैं।

5- इस आंदोलन को खालिस्तानी और नक्सली-माओवादी कहकर बदनाम करने की कोशिश नाकाम साबित हुई है, बल्कि इसका उलटा असर पड़ा है।

6- इस आंदोलन की रीढ़ पंजाबी सिख और जाट हैं, जो गहरे स्तर पर मानवतावादी होने के साथ ही अपने मान-सम्मान के लिए लडाकू कौम रही है। अत्याचारी शासकों के खिलाफ संघर्ष और कुर्बानी की इनकी करीब 500 वर्षों की परंपरा है।

7- यह मेहनतकश किसानों का जनांदोलन है, जो खुद अपने खेतों में अपने परिवार सहित कठिन श्रम करते हैं, भले ही इसके साथ वे मजदूरों का उपयोग करते हों। वे अपने खेतों में अपने पूरे परिवार सहित काम करते हैं, जिसमें महिला-पुरूष दोनों शामिल हैं।

8- इस आंदोलन की रीढ़ मूलत: पंजाब-हरियाणा के वे किसान हैं, जिनकी समृद्धि एवं संपन्नता का मूल आधार उनकी खेती है।

9- यह आंदोलन उन किसानों का आंदोलन है, जो अपने आर्थिक संसाधनों के बलबूते इस आंदोलन को महीनों-वर्षों टिकाए रख सकते हैं।

10- प्राकृतिक आपदा, युद्ध, जनसंघर्षों-जनांदोलनों आदि में देश-दुनिया के हर क्षेत्र में हर समुदाय के लिए सहायता पहुंचाने वाले सिखों के देशव्यापी एवं विश्वव्यापी समूह इस आंदोलन की हर तरह से मानवीय सहायता कर रहे हैं।

11- कुछ जड़सूत्रवादी वामपंथियों को छोड़कर हर तरह के जनवादी-प्रगतिशील समूह इस आंदोलन के साथ हैं, वे अपने तरीके से हर संभव मदद इस आंदोलन को पहुंचा रहे हैं।

12- देश के किसानों, विशेषकर पंजाब-हरियाण के किसानों को इस बिल से यह संंदेश गया है कि मोदी सरकार किसानों की फसल और जमीन अपने कार्पोरेट मित्रों ( अंबानी-अडानी) को सौंपना चाहती है और उन्हें इन कार्पोरेट घरानों का गुलाम किसान या मजदूर बना देना चाहती है। उनकी सोच आधार है, क्योंकि दुनिया के कई सारे देशों में ऐसा हुआ और इसकी तरीके से कार्पोरेटे को खेती की जमीन सौंपी गई।

13- सिंघू बार्डर और टिकरी बार्डर पर मौजूद किसान इस आंदोलन को अपने जीवन-मरण के प्रश्न के रूप में देखने लगे हैं। उन्हें यह विश्वास हो गया है कि यदि ये कानून लागू हो गए तो उनकी जितनी भी और जैसी संपन्नता एवं समृद्धि है, वह खत्म ही हो जाएगी, इसके साथ आने वाली पीढियां भी बर्बाद हो जायेंगी।

14- यह एक ऐसा जनांदोलन है, जिसके निशान पर कार्पोरेट घराने और उनके मीडिया हाउस भी हैं।

15- इस जनांदोलन में शामिल अधिकांश किसानों को यह विश्वास हो गया है कि मोदी सिर्फ कार्पोरेट घरानों के लिए काम करते हैं, वे उनके हाथ की कठपुतली हैं। अंबानी-अडानी जो चाहते हैं, वही होता है। यह मोदी की सरकार नहीं अंबानी-अड़ानी की सरकार है। उनका कहना है कि यह कानून भी अंबानी-अडानी के हितों के लिए बनाया गया है।

16- इस जनांदोलन को बहुलांश वैकल्पिक मीडिया का खुला समर्थन प्राप्त है और सोशल मीडिया भी इस जनांदोलन को समर्थन दे रही है।

17- इस जनांदोलन को मोदी जी हिंदू-मुस्लिम का एंगल या पाकिस्तान का एंगल नहीं दे पा रहे हैं। सिर्फ उनके पास कोसने के लिए विपक्षी पार्टियां हैं। विपक्षी पार्टियां किसानों को गुमराह कर रही हैं यह तर्क अधिकांश लोगों के गले नहीं उतर रहा है। शायद भीतर से मोदी सरकार को भी इस पर भरोसा नहीं।

18- भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के वादों को पूरा करने में मोदी जितन भी सफल हुए हो, लेकिन आर्थिक मामलों में उन्होंने जितने भी वादे किए उन सभी में वे अविश्वसनीय साबित हुए हैं। जिसके चलते मोदी जी के किसी भी वादे पर किसानों को भरोसा नहीं है, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि वे किसानों के नहीं कार्पोरेट के दोस्त हैं और उनके द्वारा पाले-पासे गए हैं।

19- इस आंदोलन को धीरे-धीरे मजदूरों का भी समर्थन प्राप्त हो रहा है, क्योंकि जिन कार्पोरेट मित्रों के लिए ये तीन कृषि कानून बने हैं, उन्हीं कार्पोरेट मित्रों के लिए मोदी सरकार तीन बड़े लेबर लॉ भी पास कर चुकी है।

20- आम गरीब जनता में भी यह संदेश जा रहा है कि यदि गेहू-चावल पैदा करने वाले किसानों की खेती कार्पोरेटे के हाथ में चली गई, तो उन्हें सस्ते गल्ले की दुकानों से मिलने वाला सस्ता अनाज मिलना भी बंद हो जाएगा और उनकी भूखमरी और कंगाली और बढ़ जाएगी।

निम्न कारणों से मोदी जी इस कानून को वापस नहीं लेना चाहते है या नहीं ले पा रहे हैं-

1- देशी-विदेशी कार्पोरेट घरानों की निगाह देश के किसानों की फसल और जमीन पर है और यह कानून देश के किसानों की फसल और जमीन पर कार्पोरेट के कब्जे का रास्ता खोलता है, जो कार्पोरेट के मुनाफे और संपदा में बेहतहाशा वृद्धि करेगा

2- खेती पर निर्भर करीब 75 करोड़ लोगों के बड़े हिस्स की तबाही उन्हें शहरी स्लम बस्तियों में जाने के लिए बाध्य करेगी, जो कार्पोरेटे घरानों के लिए बहुत ही सस्ते मजदूर के रूप में उपलब्ध होंगे। यही कार्पोरेट घराने चाहते हैं.

3- खाद्य उत्पादों पर कार्पोरेट का नियंत्रण उन्हें बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं से मुनाफा कमाने का अवसर प्रदान करेगा।

4- चुनाव जीतने के लिए कार्पोरेट घरानों द्वारा भाजपा को मुहैया कराए गए अकूत धन की वसूली के लिए कृषि क्षेत्र को कार्पोरेट घरानों को सौंपना नरेंद्र मोदी की बाध्यता है, जैसे आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को और बैंकों एवं भारतीय जीवन बीमा निगम की पूंजी को।

5- इसके साथ मोदी का व्यक्तिगत अहंकार भी इसके आड़े आ रहा होगा,जिस व्यक्ति ने देश को तबाह कर देने वाली नोटबंदी को भी आज तक अपनी गलती नहीं मानी, वह कैसे मान लेगा कि ये तीन कृषि कानून गलत हैं और उन्हें वापस लिया जा रहा है।

मोदी जी इन कृषि कानूनों को वापस लेने या स्थगित करने की जगह गुरु तेगबहादुर के शहदी दिवस पर उन्हें माथा टेकने का भावात्मक खेल खेल रहे हैं। लेकिन इस जनांदोलन में शामिल किसान इस पाखंड कह रहे हैं।

किसान आर-पार की लडाई की तैयारी के साथ बार्डर पर डटे हुए हैं, पीछे से उन्हें रसद मुहैया हो रही है, देखना है कि इन जाबांज किसानों के सामने मोदी सरकार कितने देर टिकती है और अपने बचाव के लिए कौन सा रास्ता निकालती है।

अबकी बार मोदी सरकार का सामने योद्धाओं की कौम से है, जिन्हें शहीद होना तो आता है, लेकिन झुकना नहीं आता। उन्हें झुकाना एक बहुत मुश्किल भरा काम है। साथ में उनका सबकुछ दांव पर लगा हुआ है।

Sunday, September 20, 2020

दुनिया को बर्बाद करने का षड्यंत्र by Munish Sharma

दोस्तों हमारे देश के चोटी के नेताओं और सत्ता में बैठे लोगों की नीयत कैसी है ये इसी बात से अंदाज़ा लगा लिजिए कि टेस्टिंग से लेकर दवाईयों से लेकर वैक्सीन से लेकर उसी वैक्सीन के Digital Certificate तक का सारा प्रोग्राम बिल गेट्स, WHO और उन अदृश्य ताकतों के कहने पे सेट किया जा रहा है जिन्हें हम Rockefeller और Rothschild इत्यादि इत्यादि के नाम से भी जानते हैं...

अब तो ID 2020 का नाम बच्चे बच्चे की ज़ुबान पर है, लेकिन इसके लिए 1992 के UNO के Rio De Jenerio में हुई सम्मेलन में ही सारा प्लान सेट कर लिया गया था जब उसके दो साल बाद David Rockefeller जो अमेरिका के बैंकों का बादशाह है उसने कह दिया था कि एक बड़ी आपदा, और विश्व हमारे घुटनों पर होगा...
तो लिजिए आज वो आपदा आपके सामने है..

शुरू में तो इसे Sustainable Development का नाम दिया गया था, परंतु बाद में इसकी सारी परतें खुलती गईं जब Climate Change और Global Warming के मुद्दे दुनिया के सामने लाए गए जिसमें ये डर पैदा किया गया कि यदि हमने जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका तो धरती का सर्वनाश हो जाएगा..

इसमें कोई संदेह नहीं कि धरती को कुदरती तौर पर बनाए रखना हर मनुष्य का कर्तव्य है परंतु जिस मानसिकता से कुछ लोगों ने ऐसे मनघड़ंत मुद्दे बनाए वो मानसिकता गलत है..आज तक सिर्फ़ और सिर्फ़ आपदाएं बनाईं गई किसी न किसी तरीके से परंतु धरती के बारे में संवेदनशीलता से नहीं सोचा गया, जो सबसे बड़े ठेकेदार बनते हैं उन्होंने ही सब कायदे-कानूनों की धज्जियां भी उड़ाई हैं..

ख़ैर, मुद्दे पर आते हैं.. तो दोस्तों ये सब समझने के लिए आपको Henry Kissinger के बारे में पढ़ना होगा, 1972 के उसके NSSM 200 प्रोग्राम को भी पढ़ना होगा जिसमें उसने साफ़ तौर पर कहा था कि अमेरिका और इसकी आने वाली नस्लों के लिए धरती की संपदाओं, कुदरती खनिजों और पानी को बचाना अति आवश्यक है जो कि बढ़ती हुई जनसंख्या से दिन-प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं...

बात यहीं नहीं रुकती, उसके बाद अथक प्रयास जारी रहे समुचे विश्व को घुटनों पर लाने के लिए जिसका प्रमाण आपको एचआईवी एड्स षड्यंत्र में भी मिल जाएगा कि कैसे अफ्रीका और अन्य ग़रीब देशों को निशाना बनाया गया आबादी नियंत्रण करने की मंशा से...

अब 1992 आते-आते कहानी बदलती जा रही थी, महामारी वाला मंत्र ठीक से चल नहीं पा रहा था, अब एक नया पैंतरा निकाला गया Global Warming और Climate Change का, दुनिया इसे सही और सच मानने लगी, बिना ये सोचे समझे कि यदि ख़बरों के ज़रिए यही अंतराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मौसम जलवायु संस्थान बताते हैं कि 100 साल पहले वाला गर्मी या बरसात का रिकार्ड अब टूटा है तो भला 100 साल पहले को Global Warming Climate Change जैसे कारण मुद्दे या लक्षण थे ?? तब कैसे ये सब होता था ?? इस सवाल का जवाब आजतक मुझे किसी जलवायु वैज्ञानिक से नहीं मिला है... और न मिलेगा...

वहां से यदि हम अगर कुछ और आगे चलें तो सन् 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई साहब ने भी इसी एजेंडे को आगे बढ़ाने की बात राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कही थी जिसे मनमोहन सिंह सरकार ने UDI बनाकर आगे बढ़ाने में सहायता की...

परंतु अभी भी बहुत कुछ और करना बाकी था तो एस ऐसी तैयारी की गई जिसे भेद पाना तरकीबन असंभव हो गया... इस बार नाम है कोरोना या COVID19 और जिसका खाका तैयार किया गया Event 201 जो 18 अक्तूबर 2019 को अमेरिका में आयोजित की गई थी... आप देख सकते हैं विडियो उपलब्ध हैं...

अब जो मोटे तौर पर बात सामने आई है वो ये है कि बिल गेट्स और उसके पीछे जो लोग ये सब कार्यक्रम चला रहे हैं वो दुनिया की आबादी को आधी से भी कम करना चाहते हैं जिसके लिए बिल गेट्स ने बहुत बार अपने इंटरव्यू में भी ज़िक्र किया है,, आप में से बहुतों ने सुना देखा होगा... अब वो आबादी वैक्सीन से कम की जाएगी ?? GMO फ़ूड से कम की जाएगी या फ़िर आर्थिक रूप से ग़रीब देशों को पंगु बनाकर लोगों को भूखे मार कर की जाएगी ये देखना अभी बाकी है...

और बाकी जो कुछ हो रहा है जैसे आनलाईन कामकाज वगैरह वगैरह वो सब इंसानों की मूवमेंट को घटाने का एक प्रयास है जिससे की उन्हीं लोगों की भविष्य में आने वाली पीढ़ी के लिए पदार्थों से लेकर तेल गैस के भंडार बचाए जा सकें..

ये जो उपर सब लिखा है इसी का नाम एजेंडा 2030 जिसका ज़िक्र प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त के दिन लाल किले की प्राचीर से भी किया था. बाकी आप सब देख सुन ही रहे हैं,, बस समय-समय पर मैं अपनी समझ अनुसार आप तक अपनी बात पहुंचा देता हूं...

अब आपको काफ़ी हद तक कोरोना के मायने समझ आ चुके होंगे....



Wednesday, August 5, 2020

हरियाणा वालों के राम

इस पूरी दुनिया मे "राम" शब्द का सबसे ज्यादा उच्चारण धरती के जिस हिस्से पर होता है वो है ― #हरियाणा

हरियाणा वो भूमि है जहाँ पर न सिर्फ स्वागत और अभिवादन के लिए राम-राम बोलते हैं अपितु सारी दुनिया में जहाँ जहाँ भगवान, ईश्वर इत्यादि शब्द प्रयोग होते हैं वहाँ पर हरियाणा में राम शब्द का प्रयोग किया जाता है । 

जैसे दुनिया कहेगी - भगवान देख रहा है, ईश्वर न्याय करेगा, धर्मराज के द्वार जाना है इत्यादि।

लेकिन हरियाणा मे कहेंगे ―

राम देखै है,
राम न्याय करेगा,
राम के घर जाना है,
राम से डर। 

हरियाणा की कहावतें भी केवल राम से संबंधित है जैसे ―

हिम्मती का राम हिमायती,
आंधे की मक्खी राम उड़ावै,
राम को राम नहीं कहता, 
अपने को राम से बड़ा समझना।

हरियाणा में आकाश को भी राम कहते है और आराम को भी राम कहते है।

जैसे दुनिया कहेगी आराम से चल, आराम कर ले।

लेकिन हरियाणा में कहेंगे कि ―

राम से चल, राम कर ले। 

जब कही जाना हो तो गाड़ी मे बैठने के बाद दुनिया वाले कहते हैं कि "चलो"

लेकिन हरियाणा मे कहते है कि ―

"चालन दो भाई लेके राम का नाम" 

हरियाणा में बारिश को भी राम कहते है। जब बरसात होती है तो दुनिया वाले कहते हैं कि बूंदे आई थी, बहुत बारिश हूई इत्यादि । 

लेकिन हरियाणा में कहते हैं कि राम जी आया था, राम जी बहुत बरसा भाई।

जब कोई किसी का हाल चाल पूछता है तो बाकी दुनिया मे कहते है कि सब बढिय़ा है इत्यादि ।

लेकिन हरियाणा मे कहते हैं कि ―

"राम राजी स" या "दया है राम की ।"

हरियाणा मे गाँव को गाम कहते हैं और हरियाणवी कहावत है कि ―

"गाम राम होता है"

हरियाणा वाले राम से प्यार करते हैं 
राम का व्यापार नहीं करते हैं 

हरियाणा के कण-कण और शब्द-शब्द मे राम बसता है और मुझे गर्व है स्वयं के हरियाणवी होने का |

🙏🏻🙏🏻राम-राम🙏🏻🙏🏻